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दैनिक वेतनभोगी से नौकरी शुरू करने वाले रिटायर्ड कर्मचारी को राहत, हाई कोर्ट ने माना पेंशन का हक

 

दैनिक वेतनभोगी के तौर पर नौकरी शुरू करने वाले एक सेवानिवृत्त कर्मचारी को हाई कोर्ट के फैसले से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी कर्मचारी ने यदि अपनी सेवा की शुरुआत दैनिक वेतनभोगी के रूप में की थी, तो केवल इस आधार पर उसे पेंशन के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। अदालत ने कर्मचारी की सेवा अवधि और बाद में हुए नियमितीकरण को ध्यान में रखते हुए पेंशन संबंधी लाभ देने का रास्ता साफ किया है।

दैनिक वेतनभोगी से शुरू हुई थी सेवा

मामला उस कर्मचारी से जुड़ा है जिसने सरकारी विभाग में अपनी नौकरी दैनिक वेतनभोगी के रूप में शुरू की थी। बाद में उसकी सेवाएं नियमित कर दी गईं और उसने विभाग में लंबे समय तक काम किया। सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से जुड़े लाभ को लेकर विवाद सामने आया।कर्मचारी की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उसने विभाग में लगातार सेवा  है और बाद में उसकी सेवा को नियमित भी किया गया। ऐसे में केवल शुरुआती नियुक्ति दैनिक वेतन के आधार पर होने के कारण पेंशन लाभ से वंचित करना उचित नहीं है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा

हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कर्मचारी के पेंशन अधिकार को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की। अदालत ने माना कि सेवा की शुरुआत दैनिक वेतनभोगी के रूप में होने मात्र से कर्मचारी के पेंशन संबंधी अधिकार खत्म नहीं हो जाते।कोर्ट ने सेवा की प्रकृति, नियमितीकरण और कर्मचारी द्वारा पूरी की गई सेवा अवधि को ध्यान में रखने पर जोर दिया। फैसले का मूल संदेश यह है कि पेंशन जैसे सेवानिवृत्ति लाभ पर विचार करते समय कर्मचारी की पूरी सेवा स्थिति और लागू नियमों को देखा जाना चाहिए।

लंबे समय तक सेवा करने वालों के लिए अहम फैसला

हाई कोर्ट के इस फैसले का महत्व उन कर्मचारियों के लिए भी है, जिन्होंने सरकारी विभागों या संस्थानों में अपनी नौकरी की शुरुआत दैनिक वेतनभोगी के रूप में की और बाद में उन्हें नियमित कर्मचारी का दर्जा मिला।ऐसे मामलों में अक्सर कर्मचारी और विभाग के बीच इस बात को लेकर विवाद होता है कि शुरुआती दैनिक वेतन की सेवा को पेंशन के लिए किस तरह माना जाए। अदालत के इस रुख से ऐसे कर्मचारियों को अपने सेवानिवृत्ति लाभ के दावे के लिए कानूनी आधार मिल सकता है।

पेंशन से जुड़े लाभ पर असर

पेंशन कर्मचारियों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद आर्थिक सुरक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसलिए सेवा की गणना और नियमितीकरण से जुड़े विवादों का सीधा असर उनके भविष्य के लाभों पर पड़ता है।हालांकि, हर मामले में पेंशन का अधिकार संबंधित सेवा नियमों, नियुक्ति की प्रकृति, नियमितीकरण की तारीख और कर्मचारी की कुल पात्र सेवा अवधि पर निर्भर करेगा। इसलिए इस फैसले को सभी दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों पर स्वतः लागू मानने के बजाय संबंधित विभाग और सेवा नियमों के आधार पर देखा जाना जरूरी है।