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हिमाचल में भारी बारिश का रेड अलर्ट हटाया गया, वीडियो में जाने अब 19 से 22 जुलाई तक ऑरेंज अलर्ट; पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एडवाइजरी जारी

 

हिमाचल प्रदेश में आगामी दिनों में भारी बारिश को लेकर मौसम विभाग ने अलर्ट में बदलाव किया है। पहले 20 और 21 जुलाई के लिए जारी किया गया रेड अलर्ट अब वापस ले लिया गया है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने गुरुवार सुबह 10:22 बजे जारी ताजा बुलेटिन में बताया कि अब 19 से 22 जुलाई तक पूरे प्रदेश में ऑरेंज अलर्ट प्रभावी रहेगा। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि रेड अलर्ट हटने के बावजूद कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन की आशंका बनी हुई है। ऐसे में लोगों और पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

इंटरनल रिव्यू के बाद बदला गया अलर्ट

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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के निदेशक शोभित कटियार ने बताया कि शुरुआती आकलन के आधार पर 20 और 21 जुलाई के लिए रेड अलर्ट जारी करने का फैसला लिया गया था। हालांकि, बाद में भारतीय मौसम विभाग (IMD) के साथ विस्तृत समीक्षा और चर्चा के बाद अलर्ट को संशोधित करते हुए रेड अलर्ट हटाकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया।

रेड और ऑरेंज अलर्ट में क्या अंतर?

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, रेड अलर्ट का मतलब अत्यधिक भारी (Extremely Very Heavy) बारिश की संभावना होता है, जिससे बड़े पैमाने पर जनजीवन प्रभावित होने, बाढ़, भूस्खलन और व्यापक नुकसान का खतरा रहता है।वहीं ऑरेंज अलर्ट के दौरान भी कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। इस स्थिति में फ्लैश फ्लड, लैंडस्लाइड, सड़क बाधित होने और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं।

पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए एडवाइजरी

मौसम विभाग ने 19 से 22 जुलाई के बीच हिमाचल आने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए विशेष एडवाइजरी जारी की है। लोगों से अपील की गई है कि वे अनावश्यक यात्रा से बचें और विशेष रूप से ऊंचाई वाले क्षेत्रों का रुख न करें।इसके अलावा, भूस्खलन संभावित इलाकों, नदी-नालों और जलधाराओं के आसपास जाने से भी बचने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने लोगों से मौसम संबंधी अपडेट पर नजर रखने और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करने को कहा है।

निचले इलाकों में फ्लैश फ्लड का खतरा

मौसम विभाग के अनुसार, लगातार बारिश के कारण प्रदेश के निचले इलाकों में अचानक बाढ़ (फ्लैश फ्लड) जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं, जिससे सड़क यातायात प्रभावित होने की आशंका है।प्रशासन ने संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं और आपदा प्रबंधन टीमें भी अलर्ट मोड पर हैं। लोगों से अपील की गई है कि वे मौसम की चेतावनियों को गंभीरता से लें और किसी भी आपात स्थिति में प्रशासन से तुरंत संपर्क करें।