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हिमाचल में बारिश-बर्फबारी से बढ़ी ठंड, 61 सड़कें बंद; 30 सितंबर से मौसम साफ होने के आसार

 

हिमाचल प्रदेश में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम ने अचानक करवट ली है। प्रदेश के कई हिस्सों में तेज बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के कारण ठंड बढ़ गई है। सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के असर से शिमला समेत कई जिलों में बारिश हुई, जबकि किन्नौर और लाहौल-स्पीति के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी दर्ज की गई। बारिश और भूस्खलन के कारण जनजीवन भी प्रभावित हुआ है। सोमवार शाम तक प्रदेश में 61 सड़कें बंद थीं और बिजली आपूर्ति पर भी असर पड़ा।

29 सितंबर को भी बारिश के आसार

मौसम विभाग के अनुसार 29 सितंबर को हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रह सकता है। कांगड़ा, मंडी, सिरमौर और किन्नौर के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ तेज बारिश की संभावना जताई गई है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का असर भी बना रह सकता है।इस मौसम के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। शिमला में सोमवार को अधिकतम तापमान करीब 16.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जबकि किन्नौर के कल्पा और लाहौल-स्पीति के केलांग जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में भी तापमान काफी नीचे रहा।

61 सड़कें बंद, बिजली व्यवस्था भी प्रभावित

भारी बारिश और भूस्खलन के चलते प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ। राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक सोमवार शाम तक 61 सड़कें बंद थीं। इससे पहले सुबह एक राष्ट्रीय राजमार्ग समेत 66 सड़कें बंद थीं। दिनभर बहाली के काम के बाद बंद सड़कों की संख्या कम हुई। किन्नौर में प्रभावित राष्ट्रीय राजमार्ग को भी बाद में बहाल कर दिया गया।बिजली आपूर्ति पर भी मौसम का असर पड़ा। बारिश से कई ट्रांसफार्मर प्रभावित हुए। विभाग की टीमें बिजली व्यवस्था को बहाल करने में जुटी रहीं और दिनभर में प्रभावित ट्रांसफार्मरों की संख्या में कमी आई।

30 सितंबर से मिल सकती है राहत

अब सबसे बड़ा सवाल है कि हिमाचल में मौसम कब सुधरेगा। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक 30 सितंबर से प्रदेश में मौसम साफ रहने की संभावना है। 30 सितंबर से 4 अक्टूबर तक बड़े पैमाने पर बारिश की गतिविधि कम रहने का अनुमान है। इसके साथ ही दक्षिण-पश्चिम मानसून की हिमाचल प्रदेश से विदाई की प्रक्रिया भी शुरू होने के आसार हैं।हालांकि, 29 सितंबर को बारिश की संभावना को देखते हुए भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने वालों को सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम साफ होने के बाद ही सड़क और बिजली व्यवस्था के पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद है।