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134 दिन बाद खुले कार्तिक स्वामी मंदिर के कपाट, वीडियो में देंखे भरमौर में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब

 

Bharmour में स्थित प्रसिद्ध कार्तिक स्वामी मंदिर कुगती के कपाट मंगलवार को 134 दिनों के बाद विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। लगभग चार महीने 13 दिन तक बंद रहने के बाद मंदिर के पुनः खुलने से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण छा गया और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचने लगे। कठोर शीतकालीन मौसम और भारी बर्फबारी के कारण हर वर्ष की तरह इस बार भी मंदिर के कपाट सर्दियों में बंद रखे गए थे। अब कपाट खुलने के साथ ही मंदिर परिसर में आध्यात्मिक उत्साह और धार्मिक गतिविधियों की शुरुआत हो गई है।

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🙏 रातभर चला जागरण, सुबह विधि-विधान से खुले कपाट

मंदिर के कपाट खुलने से एक दिन पहले से ही वहां भक्ति का माहौल बन गया था। पूरी रात मंदिर परिसर में जागरण का आयोजन किया गया, जिसमें भजन-कीर्तन और धार्मिक अनुष्ठानों का सिलसिला चलता रहा।इस धार्मिक आयोजन में Himachal Pradesh के अलावा पंजाब, हरियाणा, जम्मू और अन्य राज्यों से आए सैकड़ों श्रद्धालु शामिल हुए। भक्तों ने पूरी रात जागकर भगवान कार्तिक स्वामी की आराधना की।मंगलवार सुबह विशेष पूजा-अर्चना, हवन और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच मंदिर के कपाट विधिवत रूप से खोले गए। कपाट खुलते ही मंदिर परिसर “जय कार्तिक स्वामी” के जयकारों से गूंज उठा।

🛕 श्रद्धालुओं की भारी भीड़, दर्शन का सिलसिला शुरू

कपाट खुलने के बाद देश के विभिन्न हिस्सों से आए श्रद्धालु अब कार्तिक स्वामी के दर्शन कर रहे हैं। मंदिर मार्गों पर भक्तों की भीड़ देखी जा रही है और स्थानीय प्रशासन द्वारा व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा एवं सुविधा प्रबंधन किया गया है।श्रद्धालुओं का कहना है कि लंबे समय बाद मंदिर के दर्शन मिलना अत्यंत सौभाग्य की बात है और इससे उन्हें मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा मिलती है।

❄️ सर्दियों में बंद रहता है मंदिर

स्थानीय मान्यताओं और परंपराओं के अनुसार, कुगती क्षेत्र में सर्दियों के दौरान अत्यधिक बर्फबारी होती है। आमतौर पर 15 नवंबर के आसपास यहां भारी हिमपात शुरू हो जाता है, जिससे आवागमन कठिन हो जाता है। इसी कारण हर वर्ष मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं।मान्यता है कि भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिक स्वामी दीपावली के बाद एकांतवास (पाताल लोक) में चले जाते हैं और तब तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं जब तक वे वापस नहीं लौट आते।

🌄 बैसाखी संक्रांति पर होती है वापसी

परंपरा के अनुसार, बैसाखी संक्रांति के अवसर पर भगवान कार्तिक स्वामी मंदिर में पुनः लौटते हैं और इसके बाद विधि-विधान से कपाट खोले जाते हैं। इसी परंपरा का पालन करते हुए इस वर्ष भी मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए।