‘भारतीय सेना को चाहिए और ताकत और आधुनिक तकनीक’, शिमला से राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का बड़ा संदेश
हिमाचल प्रदेश की राजधानी Shimla में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति Droupadi Murmu ने भारतीय सशस्त्र बलों की भूमिका, देश की सुरक्षा चुनौतियों और भविष्य की रक्षा आवश्यकताओं पर महत्वपूर्ण संदेश दिया। अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात को देखते हुए भारतीय सेना को और अधिक ताकत, तकनीक और आधुनिक संसाधनों से लैस करना समय की आवश्यकता है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि भारत आज जिस तेजी से वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, उसी गति से रक्षा क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता और तकनीकी उन्नति जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सीमाओं की सुरक्षा केवल साहस और परंपरागत शक्ति से नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक और नवाचार से भी सुनिश्चित होती है।
आधुनिक युद्ध प्रणाली पर जोर
अपने संदेश में राष्ट्रपति ने कहा कि आज का समय तकनीक आधारित युद्ध प्रणाली का है, जिसमें साइबर सुरक्षा, ड्रोन तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और स्पेस टेक्नोलॉजी जैसी क्षमताएं बेहद महत्वपूर्ण हो गई हैं। ऐसे में भारतीय सेना को इन क्षेत्रों में लगातार मजबूत करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारतीय सेना पहले से ही दुनिया की सबसे अनुशासित और सक्षम सेनाओं में से एक है, लेकिन भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए इसे और अधिक उन्नत बनाना आवश्यक है।
सैनिकों के योगदान की सराहना
राष्ट्रपति ने देश के सैनिकों की सराहना करते हुए कहा कि वे कठिन परिस्थितियों में भी देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। चाहे ऊंचे पहाड़ी क्षेत्र हों, रेगिस्तान हो या समुद्री सीमाएं—भारतीय सैनिक हर जगह अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि देश की जनता अपने सैनिकों के साहस और बलिदान पर गर्व करती है और सरकार का कर्तव्य है कि उन्हें सर्वोत्तम सुविधाएं और आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए जाएं।
आत्मनिर्भर भारत और रक्षा उत्पादन
राष्ट्रपति ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है। इससे न केवल देश की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार और तकनीकी विकास के नए अवसर भी पैदा होंगे।
उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा उपकरणों के आयात पर निर्भरता कम कर रहा है और धीरे-धीरे एक मजबूत रक्षा निर्माण देश के रूप में उभर रहा है।
युवाओं की भूमिका
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने युवाओं से भी आह्वान किया कि वे रक्षा अनुसंधान, तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में आगे आएं। उन्होंने कहा कि आने वाला समय उन्हीं देशों का होगा जो तकनीक में आगे रहेंगे।