Greenopolis प्रोजेक्ट के खरीदारों को कैसे मिलेगी राहत? पूर्व CJI संजीव खन्ना की अध्यक्षता में बनी कमेटी करेगी दावों की जांच
गुरुग्राम के Greenopolis हाउसिंग प्रोजेक्ट में लंबे समय से फंसे होमबायर्स के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश से राहत की उम्मीद जगी है। कोर्ट ने प्रोजेक्ट के वास्तविक और पात्र खरीदारों के दावों की जांच के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय मॉनिटरिंग कमेटी का गठन किया है। कमेटी का मुख्य काम यह पता लगाना होगा कि कौन से खरीदार वास्तविक हैं और उन्होंने प्रोजेक्ट में कितनी राशि जमा की है।
इस कमेटी में पूर्व CJI संजीव खन्ना के अलावा दिल्ली हायर ज्यूडिशियल सर्विस के दो पूर्व अधिकारी एचएस शर्मा और अजय कुहर शामिल हैं। दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस अनूप भंभानी ने मामले में सुनवाई करते हुए कमेटी गठित की। कोर्ट के अनुसार, कमेटी एक पारदर्शी और जल्द पूरी होने वाली प्रक्रिया तैयार करेगी, जिसके जरिए वास्तविक खरीदारों और उनके भुगतान की पुष्टि की जाएगी।
कैसे तय होगा कौन है असली खरीदार
कमेटी खरीदारों की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और भुगतान से जुड़ी जानकारी की जांच करेगी। इसके साथ ही प्रवर्तन निदेशालय यानी ED के पास मौजूद रिकॉर्ड से भी इन जानकारियों का मिलान किया जाएगा। इस प्रक्रिया के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किस खरीदार ने कितनी रकम जमा की और उसके दावे की स्थिति क्या है।
कोर्ट ने कहा है कि खरीदारों के दावों का निपटारा प्रोजेक्ट से संबंधित व्यक्तिगत संपत्तियों की ED द्वारा की गई कुर्की की स्थिति को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा। यानी प्रत्येक खरीदार के दावे और संबंधित संपत्ति की कानूनी स्थिति के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी।
1,650 से ज्यादा खरीदारों का पैसा फंसा
Greenopolis प्रोजेक्ट गुरुग्राम के सेक्टर-89 में शुरू किया गया था। इसे 3C Shelters और Orris Infrastructure द्वारा विकसित किया जाना था। प्रोजेक्ट में कुल 1,862 यूनिट प्रस्तावित थीं, जिनमें करीब 1,650 यूनिट खरीदारों को आवंटित की गई थीं। निर्माण कार्य बीच में रुक गया और खरीदार लंबे समय से अपने घर या जमा रकम की वापसी का इंतजार कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, खरीदारों ने 3C Shelters को करीब 776.60 करोड़ रुपये और Orris को करीब 383.06 करोड़ रुपये का भुगतान किया था। खरीदारों की मांग है कि उन्हें या तो बुक किए गए घरों का कब्जा दिया जाए और देरी के लिए मुआवजा मिले, या फिर उनकी पूरी रकम ब्याज सहित वापस की जाए।
ED की कार्रवाई का भी असर
Greenopolis मामले में ED ने भी जांच की है और डेवलपर्स की कुछ संपत्तियों तथा परिसंपत्तियों को कुर्क किया था। दिल्ली हाईकोर्ट ने हालिया आदेश में PMLA कोर्ट द्वारा कुर्क संपत्ति बहाल करने के आदेश को भी रद्द कर दिया। ऐसे में खरीदारों के दावों और कुर्क संपत्तियों की स्थिति को लेकर नई कमेटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
अब खरीदारों को अपनी पहचान, अलॉटमेंट और भुगतान से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अपने दावे की पुष्टि करानी होगी। कमेटी की जांच के बाद पात्र खरीदारों के दावों पर आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा। हालांकि, तत्काल कब्जा या रिफंड की गारंटी कोर्ट के आदेश में नहीं दी गई है; पहले खरीदारों के दावों और भुगतान की सत्यता की जांच की जाएगी।