वेनेजुएला में फंसे हिमाचल के बेटे रक्षित चौहान की सलामती को लेकर परिजनों की सरकार से गुहार, शादी की खुशियां बदलीं मातम में
सात समंदर पार वेनेजुएला में फंसे हिमाचल प्रदेश के पालमपुर निवासी रक्षित चौहान की सलामती को लेकर उसका पूरा परिवार गहरे संकट और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा है। परिजन हाथ जोड़कर केंद्र और राज्य सरकार से बेटे को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने की गुहार लगा रहे हैं। रक्षित चौहान मर्चेंट नेवी के एक जहाज पर क्रू मेंबर के तौर पर तैनात थे, लेकिन अब उस जहाज को अमेरिकी अधिकारियों (US Officials) द्वारा सीज किए जाने की खबर सामने आई है। इसके बाद से ही रक्षित से संपर्क टूट गया है, जिससे परिवार की चिंता और बढ़ गई है।
जानकारी के मुताबिक, रक्षित चौहान पिछले कुछ समय से मर्चेंट नेवी में सेवाएं दे रहे थे और वेनेजुएला के पास एक जहाज पर तैनात थे। हाल ही में परिजनों को पता चला कि जिस जहाज पर रक्षित मौजूद थे, उसे अमेरिकी अधिकारियों ने जब्त कर लिया है। इसके बाद से न तो रक्षित से कोई संपर्क हो पा रहा है और न ही उसकी स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने आई है। इस अनिश्चितता ने पूरे परिवार को मानसिक रूप से तोड़कर रख दिया है।
रक्षित के घर में इन दिनों खुशी का माहौल होना चाहिए था। परिवार में उसकी शादी की तैयारियां जोरों पर थीं। रिश्तेदारों और दोस्तों को न्योते देने की योजना बन रही थी, लेकिन बेटे की गुमशुदगी की खबर ने सारी खुशियों को मातम में बदल दिया। घर, जो शादी की रौनक से भरने वाला था, अब सन्नाटे और चिंता से घिर गया है। रक्षित के माता-पिता की आंखें हर पल बेटे की सलामती की खबर का इंतजार कर रही हैं।
परिजनों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय प्रशासन, जनप्रतिनिधियों और विदेश मंत्रालय तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश की है। परिवार ने सरकार से अपील की है कि इस मामले में जल्द से जल्द हस्तक्षेप किया जाए और रक्षित की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जाए। परिजनों का आरोप है कि अब तक उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने भी रक्षित चौहान के समर्थन में आवाज उठानी शुरू कर दी है। लोगों का कहना है कि विदेशों में काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर सरकार को गंभीर कदम उठाने चाहिए। ऐसे मामलों में त्वरित कूटनीतिक प्रयास बेहद जरूरी होते हैं, ताकि किसी भी भारतीय नागरिक को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर विदेशों में काम करने वाले भारतीय युवाओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल रक्षित चौहान की सही स्थिति क्या है और वह सुरक्षित हैं या नहीं, इसको लेकर स्थिति साफ नहीं है। परिवार की बस यही मांग है कि उनका बेटा सकुशल घर लौट आए और शादी की जो खुशियां मातम में बदल गई हैं, वे फिर से लौट सकें।