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हिमाचल हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, बिजली कटने पर डीजल जेनरेटर चलाने वालों को मिली राहत

 

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने बिजली कटने के दौरान डीजल जेनरेटर से अपने इस्तेमाल के लिए बिजली पैदा करने वाली कंपनियों और अन्य उपभोक्ताओं को बड़ी राहत दी है। अदालत के इस फैसले से उन संस्थानों और उपभोक्ताओं को राहत मिलने की उम्मीद है, जो बिजली आपूर्ति बाधित होने पर अपनी जरूरत पूरी करने के लिए जेनरेटर का इस्तेमाल करते हैं।

दरअसल, हिमाचल प्रदेश में बिजली आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में कई कंपनियां, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और अन्य उपभोक्ता वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर डीजल जेनरेटर चलाते हैं। ऐसे मामलों को लेकर कर और अन्य नियामकीय प्रावधानों से जुड़े सवाल अदालत के सामने पहुंचे थे। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने संबंधित प्रावधानों और उपभोक्ताओं की स्थिति पर विचार किया।

हाईकोर्ट के फैसले को उन उपभोक्ताओं के लिए अहम माना जा रहा है, जो बिजली की नियमित आपूर्ति पर निर्भर हैं, लेकिन कटौती होने पर अपनी गतिविधियां जारी रखने के लिए जेनरेटर से बिजली पैदा करते हैं। खासतौर पर औद्योगिक इकाइयों, अस्पतालों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और अन्य संस्थानों में बिजली बैकअप के लिए डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है।

अदालत की ओर से दी गई राहत का असर उन मामलों पर पड़ सकता है, जहां उपभोक्ता बिजली बेचने या व्यावसायिक रूप से आपूर्ति करने के बजाय केवल अपने उपयोग के लिए जेनरेटर से बिजली तैयार करते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के आदेश को उपभोक्ताओं के अधिकारों और बिजली आपूर्ति से जुड़े नियमों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बिजली कटौती के दौरान जेनरेटर चलाने पर ईंधन की लागत के साथ-साथ अलग-अलग शुल्क और नियामकीय दायित्व भी उपभोक्ताओं पर पड़ते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले से कंपनियों और अन्य उपभोक्ताओं को आर्थिक राहत मिलने की संभावना है।

हालांकि, इस फैसले के वास्तविक प्रभाव को समझने के लिए अदालत के आदेश में दिए गए विस्तृत निर्देश और संबंधित नियमों को देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल हाईकोर्ट का यह फैसला उन उपभोक्ताओं के लिए राहत भरा माना जा रहा है, जो बिजली आपूर्ति बाधित होने पर डीजल जेनरेटर के जरिए अपनी जरूरत पूरी करते हैं।