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हिमाचल हाई कोर्ट ने 22 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग वाली याचिका की खारिज

 

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने दिवंगत तदर्थ कर्मचारी के बेटे की अनुकंपा नियुक्ति की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि कर्मचारी की मृत्यु के 22 साल बाद नियुक्ति के लिए आवेदन करना नीति के अनुरूप नहीं है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को तत्काल आर्थिक संकट से राहत देना होता है, न कि वर्षों बाद रोजगार उपलब्ध कराना।

पिता की मौत के बाद मांगी थी नियुक्ति

याचिकाकर्ता ने अपने दिवंगत पिता के स्थान पर अनुकंपा आधार पर नौकरी देने की मांग को लेकर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में कहा गया था कि वह नियुक्ति का हकदार है।हालांकि, अदालत ने मामले की परिस्थितियों को देखते हुए याचिका को स्वीकार नहीं किया।

अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य तत्काल राहत

हाई कोर्ट ने कहा कि अनुकंपा नियुक्ति नियमित भर्ती प्रक्रिया का विकल्प नहीं है। इसका उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद उसके आश्रित परिवार को तत्काल आर्थिक कठिनाइयों से उबारना होता है।अदालत ने माना कि इतने लंबे समय बाद नियुक्ति देने से अनुकंपा नियुक्ति की मूल भावना प्रभावित होती है।

नीति के खिलाफ बताया आवेदन

हाई कोर्ट ने कहा कि पिता की मृत्यु के 22 साल बाद किया गया आवेदन अनुकंपा नियुक्ति की नीति के उद्देश्य और नियमों के खिलाफ है। इसी आधार पर अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।फैसले के बाद अनुकंपा नियुक्ति से जुड़े मामलों में समय सीमा और नीति के उद्देश्य को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।