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पहाड़ों में भी तपिश का कहर: शिमला समेत हिमाचल के हिल स्टेशनों में तापमान ने तोड़ा रिकॉर्ड, पर्यटक परेशान

 

मैदानी इलाकों के साथ-साथ अब पहाड़ी राज्यों के प्रमुख हिल स्टेशनों में भी गर्मी का असर तेजी से बढ़ता जा रहा है। कभी अपनी ठंडी हवाओं और सुहावने मौसम के लिए मशहूर राजधानी शिमला में इस समय हालात बदलते नजर आ रहे हैं। सोमवार को शिमला में तापमान में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मौसम विभाग के अनुसार, इस साल सामान्य से अधिक गर्मी पड़ रही है और इसका असर सिर्फ मैदानी क्षेत्रों तक सीमित नहीं रह गया है। हिमाचल प्रदेश के शिमला, मनाली, धर्मशाला और डलहौजी जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों में भी तापमान लगातार ऊपर जा रहा है। शिमला में सोमवार को अधिकतम तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक दर्ज किया गया, जिससे दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा सा देखने को मिला।

स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों की तुलना में इस बार गर्मी का असर काफी तेज है। आमतौर पर जहां अप्रैल और मई के महीने में हल्की ठंडक बनी रहती थी, वहीं इस बार दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाएं लोगों को परेशान कर रही हैं। कई घरों में पंखों और कूलरों का उपयोग पहले से ही शुरू हो गया है, जो कि शिमला जैसे ठंडे क्षेत्र के लिए असामान्य माना जाता है।

पर्यटन पर भी इसका असर साफ दिखाई दे रहा है। देशभर से शिमला आने वाले सैलानियों को उम्मीद होती है कि वे यहां ठंडे और आरामदायक मौसम का आनंद लेंगे, लेकिन बढ़ते तापमान ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कई पर्यटकों ने शिकायत की है कि दिन के समय बाहर घूमना मुश्किल हो रहा है और उन्हें होटलों में ही रहना पड़ रहा है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बदलाव के पीछे जलवायु परिवर्तन एक प्रमुख कारण हो सकता है। लगातार बढ़ते ग्लोबल टेम्परेचर का असर अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी साफ दिखाई देने लगा है। इसके अलावा, वनों की कटाई और अनियमित मौसम पैटर्न भी इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं।

प्रशासन ने लोगों को सलाह दी है कि वे दोपहर के समय अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें और पर्याप्त मात्रा में पानी का सेवन करें। साथ ही, पर्यटकों को भी सतर्क रहने और मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करने की अपील की गई है।

अगर यही स्थिति बनी रही तो आने वाले दिनों में हिल स्टेशनों की प्राकृतिक ठंडक भी इतिहास बन सकती है। विशेषज्ञों ने इसे एक चेतावनी संकेत बताया है, जिस पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता है।