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हिमाचल प्रदेश में ओलावृष्टि का कहर, सेब की फसल तबाह, फुटेज में देंखे मौसम विभाग ने 5 दिन तक अलर्ट जारी किया

 

हिमाचल प्रदेश के बागवानों पर लगातार हो रही ओलावृष्टि भारी पड़ रही है। राज्य के कई इलाकों में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने सेब की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचाया है, जिससे बागवानी से जुड़े किसानों की चिंता बढ़ गई है। कई स्थानों पर एंटी-हेल नेट, बांस के ढांचे और सेब के पेड़ तक टूटकर क्षतिग्रस्त हो गए हैं।स्थानीय बागवानों के अनुसार, इस प्राकृतिक आपदा से उन्हें लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। जिन पेड़ों पर इस साल बेहतर फसल की उम्मीद थी, वे अब बुरी तरह प्रभावित हो चुके हैं। ओलावृष्टि के कारण सेब की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर गहरा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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मौसम विभाग ने आने वाले दिनों के लिए भी स्थिति को गंभीर बताते हुए चेतावनी जारी की है। पूर्वानुमान के अनुसार, अगले पांच दिनों तक हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और ओलावृष्टि से राहत मिलने के आसार नहीं हैं।खासकर 3 और 4 मई को भारी ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इस दौरान चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिलों में ओलावृष्टि के साथ-साथ तेज हवाएं चलने की भी संभावना जताई गई है। मौसम विभाग ने इन क्षेत्रों में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफान चलने का पूर्वानुमान भी जारी किया है, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है।

इसके अलावा 5 और 6 मई को भी येलो अलर्ट जारी किया गया है, जिसमें हल्की से मध्यम बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। विभाग ने लोगों और बागवानों को सतर्क रहने और सुरक्षित उपाय अपनाने की सलाह दी है।लगातार खराब मौसम के चलते राज्य के बागवानी क्षेत्र पर गहरा असर पड़ रहा है। सेब उत्पादन हिमाचल की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, ऐसे में इस तरह की प्राकृतिक आपदाएं किसानों की आय पर सीधा प्रभाव डालती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते मौसम पैटर्न और बढ़ती चरम मौसमी घटनाएं अब बागवानी क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। वहीं, प्रशासन द्वारा नुकसान का आकलन किया जा रहा है और प्रभावित क्षेत्रों में सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही जा रही है। फिलहाल, बागवानों की नजर मौसम के अगले कुछ दिनों पर टिकी हुई है, क्योंकि यही समय तय करेगा कि इस साल की फसल कितनी बच पाती है और कितना नुकसान झेलना पड़ेगा।