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Dharamshala News: एक्सपायरी नूडल्स बेचने पर रिटेल कंपनी पर 20 हजार का जुर्माना, आयोग ने कहा- ग्राहक की नहीं स्टोर की जिम्मेदारी

 

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (धर्मशाला) उपभोक्ता आयोग ने एक्सपायरी खाद्य सामग्री बेचने के मामले में एक नामी रिटेल कंपनी पर सख्त कार्रवाई की है। आयोग ने 3 महीने पुराने एक्सपायरी 'स्पाइसी कोरियन नूडल्स' बेचने पर कंपनी पर कुल 20 हजार रुपये का जुर्माना और मुकदमा खर्च लगाने का आदेश दिया है।

यह मामला ग्राहक जुगल किशोर की शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि उनकी नाबालिग बेटी ने स्टोर से खरीदे गए एक्सपायरी नूडल्स खाए, जिसके बाद उसकी तबीयत खराब हो गई थी।

एक्सपायरी सामान बेचने पर आयोग सख्त

कांगड़ा उपभोक्ता आयोग ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि बाजार में बिकने वाले खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और एक्सपायरी डेट की जांच करना दुकानदार और स्टोर प्रबंधन की जिम्मेदारी है।

आयोग ने रिटेल कंपनी की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि ग्राहक को खुद सामान खरीदते समय उसकी एक्सपायरी डेट देखनी चाहिए।

ग्राहक पर नहीं डाली जा सकती जिम्मेदारी

आयोग ने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्टोर में रखे गए उत्पादों की निगरानी करना प्रबंधन का काम है। एक्सपायरी सामान को शेल्फ से हटाना और ग्राहकों तक पहुंचने से रोकना स्टोर की जिम्मेदारी है।

अदालत ने कहा कि ग्राहक को ऐसी वस्तु बेचना, जिसकी वैधता समाप्त हो चुकी है, उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन है।

नाबालिग बेटी की तबीयत बिगड़ी थी

शिकायतकर्ता जुगल किशोर के अनुसार, उन्होंने रिटेल स्टोर से 'स्पाइसी कोरियन नूडल्स' खरीदे थे। खाने के बाद उनकी नाबालिग बेटी की तबीयत खराब हो गई।

इसके बाद उन्होंने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कर न्याय की मांग की थी। सुनवाई के दौरान सामने आया कि नूडल्स की एक्सपायरी डेट काफी पहले निकल चुकी थी।

कंपनी को देना होगा जुर्माना और खर्च

आयोग ने रिटेल कंपनी को ग्राहक को राहत देने के लिए 20 हजार रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। इसमें जुर्माना राशि और मुकदमे का खर्च शामिल है।

फैसले के बाद उपभोक्ता अधिकारों को लेकर एक बार फिर यह संदेश गया है कि खाद्य सामग्री बेचने वाले प्रतिष्ठानों को गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन करना होगा।

खाद्य सुरक्षा को लेकर उठे सवाल

इस मामले ने एक बार फिर दुकानों और बड़े रिटेल स्टोर्स में खाद्य उत्पादों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कंपनियों को नियमित जांच और एक्सपायरी उत्पादों को हटाने की प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए।