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ददाहू होम स्टे मामला: सभी आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट लगाने की सरकार की मांग खारिज, कोर्ट बोली-सिर्फ मौजूदगी से साजिश साबित नहीं

 

हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के ददाहू स्थित एक निजी होम स्टे में जुआ खेलने के मामले में पकड़े गए आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने राज्य सरकार की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें सभी आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत आरोप जोड़ने की अपील की गई थी। विशेष न्यायाधीश ने साफ कहा कि नशीले पदार्थ की बरामदगी केवल एक आरोपी से हुई है, ऐसे में बाकी लोगों पर यह कानून लागू नहीं किया जा सकता।

यह मामला वर्ष 2021 का है, जब पुलिस ने ददाहू के एक निजी होम स्टे में छापेमारी कर जुआ खेलते हुए कई लोगों को पकड़ा था। कार्रवाई के दौरान एक व्यक्ति के पास से नशीला पदार्थ भी बरामद हुआ था। इसके बाद पुलिस ने जुआ अधिनियम के तहत कार्रवाई की थी, जबकि बाद में सरकार ने सभी आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत भी मामला दर्ज करने की मांग की।

सरकार का तर्क था कि सभी आरोपी एक ही कमरे में मौजूद थे, इसलिए उन्हें साजिश और सहयोग के तहत एनडीपीएस एक्ट में शामिल किया जाना चाहिए। हालांकि अदालत ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।

विशेष न्यायाधीश ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि नशीली दवाओं की बरामदगी सिर्फ एक आरोपी से हुई है और अन्य आरोपियों के खिलाफ ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो सके कि वे इस अपराध में शामिल थे या उन्होंने किसी तरह की साजिश रची थी। अदालत ने कहा कि केवल एक कमरे में मौजूद होना या जुआ खेलना एनडीपीएस एक्ट के तहत आपराधिक साजिश का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि एनडीपीएस एक्ट एक सख्त कानून है, इसलिए इसे लागू करने के लिए ठोस और स्पष्ट साक्ष्य जरूरी हैं। बिना पर्याप्त सबूत के किसी व्यक्ति पर गंभीर धाराएं लगाना न्यायसंगत नहीं है।

इस फैसले के बाद अन्य आरोपियों को बड़ी राहत मिली है। अब उनके खिलाफ केवल जुआ अधिनियम से जुड़े मामलों में ही कार्रवाई जारी रहेगी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत का यह फैसला भविष्य में ऐसे मामलों के लिए एक मिसाल साबित हो सकता है, जहां बिना पर्याप्त साक्ष्य के सख्त धाराएं लगाने की कोशिश की जाती है। फिलहाल यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में साक्ष्यों की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करता है।