मुख्यमंत्री सुक्खू ने ऊना के कोटला कलां में श्री राधाकृष्ण मंदिर के वार्षिक महासम्मेलन में लिया हिस्सा
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ऊना जिले के कोटला कलां स्थित श्री राधाकृष्ण मंदिर समिति द्वारा आयोजित वार्षिक धार्मिक महासम्मेलन में बुधवार को भाग लिया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और माथा टेका। उन्होंने राष्ट्रीय संत बाबा बाल जी महाराज से आशीर्वाद प्राप्त कर धार्मिक कार्यक्रम में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने इस दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि श्रीमद्भागवत गीता में कर्म करने और फल की चिंता न करने का संदेश दिया गया है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार इसी कर्मयोग की भावना के तहत प्रदेश के जनकल्याण के कार्यों में निरंतर जुटी हुई है। हम सभी योजनाओं और पहलों को आमजन, महिलाओं और गरीब वर्ग के कल्याण की दृष्टि से लागू कर रहे हैं। हमारा प्रयास है कि राज्य के प्रत्येक नागरिक तक विकास और समावेशिता का लाभ पहुंचे।”
मुख्यमंत्री ने मंदिर समिति और आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों से समाज में नैतिक और आध्यात्मिक चेतना बढ़ती है। उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से भी यह अपील की कि वे सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लें और समाज में भाईचारे तथा सहिष्णुता का संदेश फैलाएं।
इस अवसर पर राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याण योजनाओं और उनके लाभों के बारे में भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं, युवाओं, गरीब और पिछड़े वर्ग के लिए संवेदनशील, समावेशी और मानवीय दृष्टिकोण के साथ योजनाओं को लागू कर रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रत्येक नीति और योजना का मूल उद्देश्य प्रदेश के नागरिकों का सर्वांगीण विकास और खुशहाली सुनिश्चित करना है।
मंडल और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, मंदिर समिति के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस वार्षिक महासम्मेलन में उपस्थित रहे। कार्यक्रम में धार्मिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने भी कार्यक्रम की भव्यता को बढ़ाया।
धार्मिक महासम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल प्रशासनिक कामकाज तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में आध्यात्मिक और नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि धर्म और कर्मयोग की भावना से जनकल्याण के कार्यों को गति मिलती है और इससे प्रदेश के सामाजिक ढांचे में स्थायित्व आता है।