जिस कुर्सी पर CJI बैठे, वही बनेगी हांसी बार की शान, चीफ जस्टिस ने पिता की पेंटिंग को माथे से लगाया
हरियाणा के हांसी में शुक्रवार को एक भावुक और ऐतिहासिक क्षण देखने को मिला, जब भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने अपने पारिवारिक और पेशेवर जीवन से जुड़ी यादों को सार्वजनिक मंच पर साझा किया। जिस कुर्सी पर बैठकर उन्होंने वर्षों पहले वकालत की शुरुआत की थी, वही कुर्सी अब हांसी बार एसोसिएशन की शान बनने जा रही है। कार्यक्रम के दौरान चीफ जस्टिस ने अपने पिता की पेंटिंग को माथे से लगाकर प्रणाम किया, जिससे पूरा माहौल भावुक हो उठा।
दरअसल, सीजेआई अपने गृह नगर हांसी पहुंचे थे, जहां बार एसोसिएशन द्वारा एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। इस दौरान उन्होंने अपने शुरुआती संघर्षों को याद करते हुए कहा कि हांसी बार ने उन्हें कानून की बारीकियां सीखने और न्याय के मूल्यों को समझने का अवसर दिया। उन्होंने बताया कि जिस कुर्सी पर बैठकर उन्होंने बतौर युवा वकील प्रैक्टिस की थी, उसी ने उनके न्यायिक जीवन की नींव रखी।
सीजेआई ने घोषणा की कि वह अपनी वह ऐतिहासिक कुर्सी हांसी बार एसोसिएशन को समर्पित करेंगे, ताकि आने वाली पीढ़ियां उससे प्रेरणा ले सकें। बार एसोसिएशन ने भी इस कुर्सी को सम्मानपूर्वक संरक्षित करने और इसे अपनी धरोहर के रूप में प्रदर्शित करने का निर्णय लिया है।
कार्यक्रम का सबसे भावुक क्षण तब आया, जब चीफ जस्टिस ने अपने पिता की पेंटिंग को मंच पर उठाकर अपने माथे से लगाया और नमन किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता न केवल उनके मार्गदर्शक थे, बल्कि उन्होंने उन्हें ईमानदारी, अनुशासन और न्याय के रास्ते पर चलने की सीख दी। सीजेआई ने कहा, “आज मैं जिस मुकाम पर हूं, उसमें मेरे पिता और इस बार की भूमिका सबसे अहम रही है।”
इस अवसर पर हांसी बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों और वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने सीजेआई का गर्मजोशी से स्वागत किया। बार एसोसिएशन ने कहा कि यह उनके लिए गर्व का क्षण है कि हांसी बार से जुड़े एक अधिवक्ता देश के सर्वोच्च न्यायिक पद तक पहुंचे।
कार्यक्रम में मौजूद अधिवक्ताओं और युवाओं ने सीजेआई के संघर्ष और सफलता की कहानी को प्रेरणादायक बताया। कई युवा वकीलों ने कहा कि यह क्षण उन्हें यह विश्वास दिलाता है कि छोटे शहरों से निकलकर भी देश के सर्वोच्च पदों तक पहुंचा जा सकता है।
इस आयोजन ने न सिर्फ हांसी बार के गौरव को बढ़ाया, बल्कि न्यायपालिका में मूल्यों, संस्कारों और पारिवारिक विरासत की अहमियत को भी उजागर किया। कार्यक्रम का समापन तालियों और सम्मान के साथ हुआ, लेकिन भावनाओं की गूंज देर तक लोगों के दिलों में बनी रही।