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कुरुक्षेत्र में राष्ट्रीय डेयरी पशु मेले का भव्य आयोजन, अंबाला की मुर्रा भैंस ने जीता दूध उत्पादन का खिताब

 

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय डेयरी पशु मेला एक बार फिर पशुपालन और डेयरी क्षेत्र की ताकत का शानदार उदाहरण बनकर सामने आया। केडीबी (कुरुक्षेत्र डेवलपमेंट बोर्ड) के मेला ग्राउंड में आयोजित यह तीन दिवसीय पशु मेला रविवार देर शाम संपन्न हो गया। मेले में देशभर के किसानों और पशुपालकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपने बेहतरीन पशुओं का प्रदर्शन किया।

इस राष्ट्रीय डेयरी पशु मेले का आयोजन डेयरी फेयर एसोसिएशन की ओर से किया गया था, जिसमें कुल 49 अलग-अलग कैटेगरी में प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। इन प्रतियोगिताओं में दूध उत्पादन, नस्ल, शारीरिक बनावट, वजन, सुंदरता और रखरखाव जैसे मानकों के आधार पर पशुओं का मूल्यांकन किया गया। मेले में हरियाणा के अलावा पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों से भी बड़ी संख्या में किसान अपने पशुओं को लेकर पहुंचे।

मेले का मुख्य आकर्षण दूध उत्पादन प्रतियोगिता रही, जिसमें अंबाला जिले के किसान बिल्लू की मुर्रा नस्ल की भैंस ने सभी को पीछे छोड़ते हुए जीत हासिल की। इस मुर्रा भैंस ने 29 लीटर से अधिक दूध देकर प्रतियोगिता में पहला स्थान प्राप्त किया। भैंस की इस उपलब्धि ने न केवल उसके मालिक को गर्व महसूस कराया, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का काम किया। आयोजकों की ओर से विजेता किसान को सम्मानित किया गया और पुरस्कार भी प्रदान किए गए।

मेले में पशुपालकों के लिए आधुनिक पशुपालन तकनीकों, संतुलित आहार, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के उपायों और पशु स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जानकारी देने के लिए विशेष स्टॉल भी लगाए गए थे। पशु चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने किसानों को बीमारियों से बचाव, टीकाकरण और नस्ल सुधार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके अलावा मशीनों, चारा प्रबंधन और डेयरी से जुड़े आधुनिक उपकरणों की प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही।

राष्ट्रीय डेयरी पशु मेला न केवल प्रतियोगिताओं तक सीमित रहा, बल्कि यह किसानों के आपसी संवाद और अनुभव साझा करने का भी एक बड़ा मंच बना। कई किसानों ने बताया कि ऐसे मेलों से उन्हें अपने पशुओं की गुणवत्ता को परखने और नई तकनीकों को अपनाने की प्रेरणा मिलती है। साथ ही, इससे पशुपालन को एक लाभकारी व्यवसाय के रूप में विकसित करने में मदद मिलती है।

आयोजकों के अनुसार, इस तरह के मेलों का उद्देश्य किसानों की आय बढ़ाना, उन्नत नस्लों को बढ़ावा देना और डेयरी सेक्टर को मजबूत करना है। मेले में भारी संख्या में लोगों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि पशुपालन आज भी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बना हुआ है।