जुड़वां बेटियों के नामकरण के लिए जेल से गांव पहुंचा काला जठेड़ी, कड़ी सुरक्षा के बीच हुईं रस्में
दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद संदीप उर्फ काला जठेड़ी रविवार को कस्टडी पैरोल पर हरियाणा के सोनीपत स्थित अपने पैतृक गांव जठेड़ी पहुंचा। वह अपनी जुड़वां बेटियों के जन्म के करीब 80 दिन बाद आयोजित नामकरण, हवन-यज्ञ और अन्य पारिवारिक रस्मों में शामिल हुआ। जठेड़ी के गांव पहुंचने पर परिवार और रिश्तेदारों की भीड़ जुट गई। उसकी सुरक्षा के लिए पुलिस का कड़ा पहरा लगाया गया था।
रिपोर्टों के मुताबिक, काला जठेड़ी को बेटियों के नामकरण समारोह में शामिल होने के लिए सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल मिली थी। अलग-अलग रिपोर्टों में पैरोल की अवधि चार से छह घंटे बताई गई है। उसे पुलिस सुरक्षा और निगरानी में तिहाड़ से जठेड़ी गांव लाया गया। घर पहुंचने पर ढोल-नगाड़ों और बैंड के साथ उसका स्वागत किया गया।
जठेड़ी गांव में उसके घर के आसपास सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। घर में प्रवेश करने वाले लोगों की जांच की गई और पुलिस ने पूरे इलाके में निगरानी रखी। परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के अलावा बड़ी संख्या में लोग भी वहां पहुंचे।
काला जठेड़ी की पत्नी अनुराधा चौधरी ने 1 जुलाई को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल में जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था। इसके बाद बेटियों के नामकरण और धार्मिक रस्मों के लिए परिवार की ओर से कार्यक्रम आयोजित किया गया। बेटियों के जन्म के समय भी काला जठेड़ी को सीमित अवधि की कस्टडी पैरोल मिली थी, तब वह अस्पताल में उनसे मिलने पहुंचा था।
नामकरण और पारिवारिक कार्यक्रम पूरा होने के बाद पुलिस उसे वापस तिहाड़ जेल ले गई। काला जठेड़ी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में कई आपराधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस सुरक्षा के बीच उसका गांव पहुंचना और परिवार के कार्यक्रम में शामिल होना इलाके में चर्चा का विषय बना रहा।