रोहतक में अंधविश्वास का असर: ‘पंच बनते ही मौत’ की अफवाह से दो गांवों में नहीं हुए नामांकन
हरियाणा के रोहतक जिले के दो गांव—सुंदरपुर और इस्माइला 9बी—में एक अजीबोगरीब अंधविश्वास के चलते पंच पदों के लिए कोई नामांकन नहीं हुआ। ग्रामीणों में फैली ‘पंच बनते ही मौत हो जाती है’ जैसी धारणा के कारण लोग इस जिम्मेदारी को लेने से बचते रहे, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हुई है।
जानकारी के अनुसार, पंचायत चुनाव प्रक्रिया के दौरान जब नामांकन की प्रक्रिया शुरू हुई, तो दोनों गांवों में एक भी व्यक्ति ने पंच पद के लिए नाम दर्ज नहीं कराया। स्थानीय स्तर पर फैली इस अफवाह ने लोगों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया।
गांव के कुछ लोगों का कहना है कि यह विश्वास पीढ़ियों से चली आ रही गलत धारणाओं और घटनाओं से जुड़ा हुआ है, जिसे लोग सच मानकर डरते हैं। इसी वजह से कोई भी व्यक्ति पंच पद की जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं हुआ।
इस स्थिति के सामने आने के बाद प्रशासन भी हरकत में आ गया है। अधिकारियों ने इसे गंभीर मामला मानते हुए लोगों को जागरूक करने की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया बाधित न हो।
प्रशासन का कहना है कि गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को समझाया जाएगा कि यह केवल एक अंधविश्वास है और इसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। साथ ही ग्रामीणों को पंचायत व्यवस्था और उनके अधिकारों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में शिक्षा और जागरूकता सबसे प्रभावी समाधान हैं, जिससे लोगों के मन में बैठे डर और भ्रांतियों को दूर किया जा सकता है।
फिलहाल, दोनों गांवों में पंच पदों के नामांकन की प्रक्रिया ठप है, और प्रशासन इस स्थिति को सामान्य करने के प्रयास में जुटा हुआ है।