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ग्रीनोपोलिस के असली खरीदारों को कैसे मिलेगी राहत? पूर्व CJI संजीव खन्ना की अध्यक्षता में बनी समिति, जानें पूरा प्लान

 

ग्रीनोपोलिस हाउसिंग प्रोजेक्ट के लंबे समय से फंसे घर खरीदारों के लिए दिल्ली हाईकोर्ट के हालिया आदेश से राहत की उम्मीद जगी है। कोर्ट ने गुरुग्राम के सेक्टर-89 स्थित ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट के वास्तविक और पात्र खरीदारों के दावों को व्यवस्थित तरीके से देखने के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता में निगरानी समिति का गठन किया है। समिति का मुख्य उद्देश्य असली खरीदारों की पहचान करना और उनके दावों की प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाना है।

इस समिति में पूर्व CJI संजीव खन्ना के अलावा दिल्ली हायर ज्यूडिशियल सर्विस के पूर्व न्यायिक अधिकारी एचएस शर्मा और अजय कुमार कुहर भी शामिल हैं। हाईकोर्ट ने यह कदम बड़ी संख्या में दावेदारों और प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की ओर से कुर्क की गई संपत्तियों पर मौजूद अलग-अलग दावों को देखते हुए उठाया है। कोर्ट का उद्देश्य ऐसी प्रक्रिया तैयार करना है, जिससे वास्तविक खरीदारों को ठोस राहत मिलने का रास्ता तेज हो सके।

कैसे होगी असली खरीदारों की पहचान

समिति सबसे पहले ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट के वास्तविक खरीदारों की सूची तैयार करेगी। इसमें उन लोगों को भी शामिल किया जा सकता है, जिन्होंने प्रोजेक्ट में यूनिट खरीदने के लिए 3C Shelters या Orris Infrastructure को भुगतान किया था। समिति खरीदारों की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और ED के पास मौजूद रिकॉर्ड और भुगतान संबंधी जानकारी का मिलान करेगी। इसके आधार पर दावों का सत्यापन किया जाएगा।

कुर्क संपत्तियों की भी होगी जानकारी

ED को समिति के सामने ग्रीनोपोलिस से जुड़े खरीदारों के उपलब्ध रिकॉर्ड के साथ-साथ अपनी ओर से कुर्क की गई सभी संपत्तियों की जानकारी रखनी होगी। इसमें संपत्ति के मालिक का विवरण, कुर्की की मौजूदा स्थिति और यदि किसी संपत्ति को लेकर कानूनी चुनौती लंबित है तो उसकी जानकारी शामिल होगी। जरूरत पड़ने पर समिति के निर्देश पर इन संपत्तियों का मूल्यांकन भी कराया जा सकता है।

खरीदारों को किन तरीकों से मिल सकती है राहत

दिल्ली हाईकोर्ट के पहले के आदेश में यह स्पष्ट किया जा चुका है कि वास्तविक ग्रीनोपोलिस खरीदार अपने मामले को निगरानी समिति के सामने रख सकते हैं। इसमें प्रोजेक्ट में यूनिट आवंटित किए जाने की मांग, प्रोजेक्ट में देरी के लिए मुआवजा या क्षतिपूर्ति और भुगतान की गई रकम ब्याज सहित वापस किए जाने की मांग शामिल है।

हालांकि समिति स्वयं PMLA के तहत संपत्तियों की अंतिम बहाली या वितरण का वैधानिक अधिकार नहीं रखती। हाईकोर्ट ने कहा है कि कुर्क संपत्तियों की बहाली से जुड़े विस्तृत निर्देश बाद के चरण में तय किए जाएंगे। साथ ही समिति की प्रक्रिया से खरीदारों के वे अधिकार प्रभावित नहीं होंगे, जो उन्हें IBC के तहत चल रही CIRP प्रक्रिया में उपलब्ध हैं।

क्या है पूरा विवाद

ग्रीनोपोलिस प्रोजेक्ट को 3C Shelters और Orris Infrastructure से जोड़ा गया है। प्रोजेक्ट के लंबे समय तक अधूरा रहने के कारण बड़ी संख्या में खरीदार प्रभावित हुए। हाईकोर्ट के सामने कई दावेदारों और कुर्क संपत्तियों पर अलग-अलग दावों का मुद्दा आया। इसी जटिलता को देखते हुए अदालत ने अब सत्यापन और दावों को व्यवस्थित करने के लिए निगरानी समिति बनाई है। करीब 1,650 खरीदारों के दावों को व्यवस्थित करने की प्रक्रिया इस समिति के जरिए आगे बढ़ेगी।

इस तरह ग्रीनोपोलिस के वास्तविक खरीदारों के लिए अगला महत्वपूर्ण चरण अपने भुगतान और खरीद से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर दावे का सत्यापन कराना होगा। समिति की प्रक्रिया के बाद पात्र दावेदारों को उपलब्ध कानूनी व्यवस्था के तहत राहत और संपत्तियों की बहाली से जुड़े अगले कदमों का रास्ता साफ होने की उम्मीद है।