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शहीद लांस नायक दिनेश शर्मा के परिजनों ने स्वतंत्रता दिवस का सम्मान ठुकराया, वीडियो में जाने मूर्ति के 1.90 लाख के भुगतान का मामला

 

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए लांस नायक दिनेश शर्मा के परिजनों ने स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाला सम्मान लेने से इनकार कर दिया। परिवार ने शहीद के सम्मान में आयोजित कार्यक्रमों और प्रशासन की कार्यशैली पर नाराजगी जताते हुए यह फैसला लिया है। परिजनों का आरोप है कि शहीद की मूर्ति बनवाने में करीब 1.90 लाख रुपए खर्च हुए, लेकिन तीन महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद इस राशि से जुड़े बिलों का भुगतान नहीं किया गया है।

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परिवार का कहना है कि मूर्ति निर्माण के लिए उन्होंने अपनी ओर से खर्च किया था। प्रशासन की तरफ से जल्द भुगतान कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन लंबे समय के बाद भी राशि नहीं मिली। परिजनों के मुताबिक, भुगतान के लिए उन्हें लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। परिवार का कहना है कि एक शहीद के सम्मान से जुड़े काम के लिए उन्हें इस तरह परेशान होना बेहद दुखद है।

परिजनों ने शहीद की मूर्ति के अनावरण कार्यक्रम को लेकर भी नाराजगी जाहिर की। परिवार के अनुसार, 7 मई को लांस नायक दिनेश शर्मा की मूर्ति का अनावरण किया जाना था। इसके लिए होडल के भाजपा विधायक हरेंद्र रामरतन को परिवार की ओर से घर जाकर कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था। परिवार का आरोप है कि इसके बावजूद विधायक कार्यक्रम में नहीं पहुंचे।परिजनों का कहना है कि कार्यक्रम में प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी भी मौजूद नहीं था। परिवार ने सवाल उठाया कि जब शहीद की मूर्ति के अनावरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम में जनप्रतिनिधि और बड़े अधिकारी शामिल नहीं हुए, तो स्वतंत्रता दिवस पर मिलने वाले सम्मान को स्वीकार करने का क्या औचित्य है।

परिवार के मुताबिक, शहीद को सम्मान देना केवल एक कार्यक्रम तक सीमित नहीं होना चाहिए। शहीद के परिवार की समस्याओं का समाधान करना और उनसे किए गए वादों को पूरा करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। परिजनों का कहना है कि वे सम्मान के विरोध में नहीं हैं, लेकिन सम्मान के साथ शहीद के परिवार की समस्याओं को भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए।स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान लेने से इनकार करने के परिवार के फैसले के बाद मामला चर्चा में आ गया है। परिजनों ने मांग की है कि मूर्ति निर्माण में खर्च हुई करीब 1.90 लाख रुपए की राशि का भुगतान जल्द किया जाए और शहीद से जुड़े कार्यक्रमों में प्रशासनिक स्तर पर उचित सम्मान सुनिश्चित किया जाए।

परिवार ने कहा कि उन्हें अधिकारियों से बार-बार आश्वासन मिलता रहा, लेकिन जमीन पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि उन्होंने स्वतंत्रता दिवस के सम्मान को स्वीकार करने से इनकार कर अपनी नाराजगी जाहिर की है।अब देखना होगा कि परिवार की शिकायत के बाद प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है। शहीद के सम्मान और मूर्ति निर्माण की राशि के भुगतान से जुड़ा यह मामला स्थानीय प्रशासन के लिए भी सवाल खड़े कर रहा है।