हरियाणा में 'अश्लील कंटेंट' पर छिड़ी बहस, वीडियो में जाने धर्मेंद्र हुड्डा के अभियान से सोशल मीडिया पर बढ़ी चर्चा
हरियाणा में सोशल मीडिया पर कथित अश्लील, अभद्र और डबल मीनिंग कंटेंट को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान चर्चा में आए और फिलहाल अमेरिका में रह रहे धर्मेंद्र हुड्डा ने ऐसे कंटेंट के खिलाफ ऑनलाइन अभियान शुरू करने का दावा किया है। उनके इस अभियान के बाद कई सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं और यह मुद्दा राज्य में चर्चा का विषय बन गया है।
35 इन्फ्लुएंसर्स की सूची तैयार करने का दावा
धर्मेंद्र हुड्डा का कहना है कि उन्होंने कथित तौर पर अश्लील या अभद्र कंटेंट बनाने वाले 35 प्रमुख सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सूची तैयार की है। उनका दावा है कि इन लोगों को विभिन्न माध्यमों से चेतावनी दी गई है कि वे अपने कंटेंट में बदलाव करें।उनके अनुसार, इस पहल के बाद कुछ इन्फ्लुएंसर्स ने भविष्य में इस तरह का कंटेंट नहीं बनाने की बात कही है, जबकि कुछ अन्य ने इस अभियान का समर्थन भी किया है।
सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस अभियान को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ कंटेंट क्रिएटर्स ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर शालीन और जिम्मेदार कंटेंट बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।वहीं, कुछ लोगों ने हरियाणवी मनोरंजन उद्योग और मंचीय प्रस्तुतियों को लेकर भी अपनी राय रखी। इस दौरान कुछ विवादित टिप्पणियां भी सामने आईं, जिन पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
कुछ लोगों ने उठाए दूसरे मुद्दे
धर्मेंद्र हुड्डा के अभियान का समर्थन करने वालों के साथ-साथ कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि समाज से जुड़े अन्य गंभीर मुद्दों, जैसे महिलाओं की सुरक्षा, अपराध और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं पर भी समान रूप से आवाज उठाई जानी चाहिए।
बहस के केंद्र में सोशल मीडिया की जिम्मेदारी
यह पूरा विवाद सोशल मीडिया पर बढ़ते कंटेंट और उसकी गुणवत्ता को लेकर नई चर्चा का कारण बना है। एक पक्ष का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर शालीन और सामाजिक मूल्यों के अनुरूप सामग्री को बढ़ावा मिलना चाहिए, जबकि दूसरा पक्ष अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कानूनी प्रक्रिया के पालन की बात कर रहा है।फिलहाल यह अभियान सोशल मीडिया पर व्यापक चर्चा का विषय बना हुआ है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या कंटेंट क्रिएटर के खिलाफ आरोपों या दावों की पुष्टि संबंधित जांच या कानूनी प्रक्रिया के बाद ही मानी जाएगी।