मां के अंतिम संस्कार में जा रहे थे देवेंद्र भारद्वाज, यमुना एक्सप्रेसवे अग्निकांड में गई जान
यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में लगी भीषण आग ने नौ लोगों की जान ले ली। इस दर्दनाक हादसे में महोबा के रहने वाले देवेंद्र भारद्वाज की भी मौत हो गई। देवेंद्र अपनी पत्नी के साथ मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए सफर कर रहे थे, लेकिन रास्ते में हुए अग्निकांड ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
देवेंद्र के परिवार के मुताबिक, वह अपनी मां के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पत्नी के साथ बस से रवाना हुए थे। परिवार को उम्मीद थी कि वह अंतिम संस्कार में पहुंचकर अपनी मां को आखिरी विदाई देंगे। लेकिन सफर के दौरान हुए हादसे के बाद यह उम्मीद मातम में बदल गई।
हादसे की जानकारी मिलने के बाद देवेंद्र के परिवार में कोहराम मच गया। उनके बेटे अपने पिता को अंतिम संस्कार के लिए भेजने के फैसले को लेकर अब खुद को दोषी महसूस कर रहे हैं। परिवार के लिए यह स्वीकार करना बेहद मुश्किल है कि जिस पिता को उन्होंने मां को अंतिम विदाई देने के लिए रवाना किया था, वह खुद कभी वापस नहीं लौटेंगे।
यमुना एक्सप्रेसवे पर स्लीपर बस में आग लगने के बाद यात्रियों को संभलने का मौका तक नहीं मिला। देखते ही देखते आग ने बस को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे में नौ यात्रियों की मौत हुई, जबकि घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई।
हादसे की सूचना मिलने पर पुलिस और राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। मृतकों की पहचान की प्रक्रिया पूरी करने के साथ ही हादसे के कारणों की जांच शुरू की गई। पुलिस और संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि बस में आग किस वजह से लगी और आग फैलने के दौरान सुरक्षा इंतजाम किस स्थिति में थे।
देवेंद्र भारद्वाज की मौत ने उनके परिवार को ऐसा दर्द दिया है, जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। एक तरफ मां के निधन का दुख था और दूसरी तरफ अंतिम संस्कार में पहुंचने निकले बेटे की भी मौत हो गई। परिवार अब इस दोहरे सदमे से गुजर रहा है।