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अब स्विमिंग पूल में होगा इलाज, अहमदाबाद में खिलाड़ियों की रिकवरी के लिए तैयार हो रहे हाईटेक हाइड्रोथेरेपी पूल

 

क्या आपने कभी सोचा है कि स्विमिंग पूल केवल तैराकी या मनोरंजन के लिए ही नहीं, बल्कि इलाज का भी प्रभावी माध्यम हो सकता है? आधुनिक खेल विज्ञान में अब हाइड्रोथेरेपी पूल तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। ये विशेष रूप से डिजाइन किए गए चिकित्सीय पूल होते हैं, जहां गर्म पानी और वैज्ञानिक तकनीकों की मदद से खिलाड़ियों और मरीजों का उपचार किया जाता है।

हाइड्रोथेरेपी पूल सामान्य स्विमिंग पूल से पूरी तरह अलग होते हैं। इन पूल का पानी लगभग 33 से 36 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रखा जाता है, जिससे शरीर की मांसपेशियों को आराम मिलता है और रक्त संचार बेहतर होता है। गर्म पानी के साथ उत्प्लावन बल यानी पानी में शरीर का हल्का महसूस होना जोड़ों और मांसपेशियों पर दबाव कम करता है। यही कारण है कि यह थेरेपी जोड़ों के दर्द, मांसपेशियों की जकड़न और खेल के दौरान लगी चोटों से उबरने में बेहद प्रभावी मानी जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हाइड्रोथेरेपी खिलाड़ियों की रिकवरी प्रक्रिया को तेज करने में अहम भूमिका निभाती है। पानी में किए जाने वाले व्यायाम शरीर पर कम दबाव डालते हैं, जिससे चोटिल खिलाड़ी बिना ज्यादा दर्द के ट्रेनिंग जारी रख सकते हैं। यही वजह है कि दुनिया के कई बड़े स्पोर्ट्स सेंटर और ओलंपिक ट्रेनिंग संस्थानों में हाइड्रोथेरेपी सुविधाएं अनिवार्य रूप से मौजूद हैं।

अब भारत में भी इस आधुनिक तकनीक को तेजी से अपनाया जा रहा है। गुजरात के अहमदाबाद में खिलाड़ियों की रिकवरी और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए अत्याधुनिक हाइड्रोथेरेपी पूल विकसित किए जा रहे हैं। माना जा रहा है कि 2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों के तहत इन सुविधाओं को विशेष महत्व दिया जा रहा है। इन पूल का उद्देश्य खिलाड़ियों को चोट से जल्दी उबरने, मांसपेशियों की थकान कम करने और प्रदर्शन में सुधार करने में मदद करना है।

खेल विशेषज्ञ बताते हैं कि हाइड्रोथेरेपी केवल खिलाड़ियों तक सीमित नहीं है। गठिया, कमर दर्द, सर्जरी के बाद रिकवरी और बुजुर्गों की फिजिकल थेरेपी में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। पानी में शरीर का संतुलन बेहतर रहता है, जिससे मरीज आसानी से एक्सरसाइज कर पाते हैं और दर्द भी कम महसूस होता है।

अहमदाबाद में विकसित हो रहे ये हाईटेक पूल भारत के खेल इंफ्रास्ट्रक्चर में एक नई शुरुआत माने जा रहे हैं। आधुनिक खेल सुविधाओं और वैज्ञानिक प्रशिक्षण के जरिए भारत अब अंतरराष्ट्रीय खेल मानकों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। आने वाले समय में हाइड्रोथेरेपी जैसी तकनीकें खिलाड़ियों की फिटनेस और प्रदर्शन सुधारने में बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।