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गुजरात HC ने BJP सांसद राजेश शुक्ल को भेजा समन, आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने का आरोप

 

गुजरात हाईकोर्ट ने बीजेपी के राज्यसभा सांसद राजेश शुक्ल को उनके खिलाफ दायर चुनावी याचिका के मामले में समन जारी किया है। कांग्रेस विधायक तुषार चौधरी ने याचिका दाखिल कर आरोप लगाया है कि शुक्ल ने राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करते समय अपने खिलाफ लंबित आपराधिक मामले की जानकारी हलफनामे में नहीं दी। अदालत ने मामले में सांसद को जवाब देने के लिए समन जारी किया है।

26 अक्टूबर को जवाब देने के लिए बुलाया

गुजरात हाईकोर्ट की जस्टिस एसवी पिंटो की एकल पीठ ने राजेश शुक्ल को समन जारी करते हुए इसे 26 अक्टूबर को वापसी योग्य रखा है। शुक्ल 11 जून 2026 को गुजरात से राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए थे। उनके चुनाव को चुनौती देते हुए कांग्रेस विधायक तुषार चौधरी ने यह चुनावी याचिका दायर की है।

हलफनामे में क्या जानकारी देने का दावा?

याचिका के मुताबिक, नामांकन के साथ दाखिल हलफनामे में राजेश शुक्ल ने कथित तौर पर बताया था कि उनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला लंबित नहीं है। वहीं याचिकाकर्ता का दावा है कि उनके खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420, 465, 467, 468 और 471 के तहत मामला दर्ज था। इन धाराओं में आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े अपराध शामिल हैं।

कांग्रेस ने चुनाव रद्द करने की मांग की

तुषार चौधरी ने अपनी याचिका में राजेश शुक्ल के राज्यसभा चुनाव को रद्द और अवैध घोषित करने की मांग की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि आपराधिक मामले की जानकारी कथित तौर पर छिपाना जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने अदालत में पक्ष रखा।

मामला पहले से हाईकोर्ट में भी पहुंचा था

याचिका में यह भी दावा किया गया है कि संबंधित आपराधिक मामले में समन जारी होने के बाद राजेश शुक्ल ने शिकायत को रद्द कराने के लिए गुजरात हाईकोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, उस मामले में अदालत की ओर से कार्यवाही पर रोक नहीं लगाई गई थी। इन दावों के आधार पर याचिका में सवाल उठाया गया है कि नामांकन के समय इस मामले का उल्लेख हलफनामे में क्यों नहीं किया गया।

हालांकि, हाईकोर्ट की ओर से समन जारी किया जाना केवल चुनावी याचिका पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया की शुरुआत है। इससे याचिका में लगाए गए आरोप अपने आप साबित नहीं होते। अब मामले में राजेश शुक्ल का पक्ष और अदालत के सामने रखे जाने वाले दस्तावेज महत्वपूर्ण होंगे। अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को प्रस्तावित है।