×

NEET री-एग्जाम के नाम पर ठगी का खुलासा, 1000 से अधिक छात्रों को बनाया शिकार; वीडियो में जाने राजस्थान-बिहार से 3 आरोपी गिरफ्तार

 

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने नीट-यूजी री-एग्जाम से पहले ऑनलाइन ठगी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में राजस्थान और बिहार से तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग नीट री-एग्जाम और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झांसा देकर छात्रों और अभिभावकों से लाखों रुपये की ठगी कर रहे थे।साइबर क्राइम अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों ने 21 जून को प्रस्तावित नीट री-एग्जाम सहित विभिन्न परीक्षाओं के पेपर उपलब्ध कराने का दावा किया था। इस बहाने उन्होंने देशभर के 1000 से अधिक छात्रों और उनके परिजनों को अपने जाल में फंसाया और उनसे मोटी रकम वसूली।

<a style="border: 0px; overflow: hidden" href=https://youtube.com/embed/3gZNwB_fUfI?autoplay=1&mute=1><img src=https://img.youtube.com/vi/3gZNwB_fUfI/hqdefault.jpg alt=""><span><div class="youtube_play"></div></span></a>" style="border: 0px; overflow: hidden;" width="640">

जांच में सामने आया है कि राजस्थान से गिरफ्तार आरोपी सुमेर सिंह मीना और आकाश मीना टेलीग्राम चैनलों तथा फर्जी वेबसाइटों के माध्यम से छात्रों तक पहुंचते थे। आरोपी सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर विज्ञापन देकर दावा करते थे कि उनके पास परीक्षा का असली प्रश्नपत्र उपलब्ध है। इस झांसे में आने वाले छात्रों से 15 हजार रुपये से लेकर 80 हजार रुपये तक की रकम वसूली जाती थी।पुलिस के अनुसार, आरोपी छात्रों और अभिभावकों को भरोसा दिलाने के लिए फर्जी स्क्रीनशॉट, नकली दस्तावेज और कथित सफल उम्मीदवारों की कहानियां भी साझा करते थे। कई बार वे परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज होने का दावा कर लोगों को भ्रमित करते थे। रकम मिलने के बाद या तो संपर्क बंद कर दिया जाता था या फिर फर्जी प्रश्नपत्र भेज दिए जाते थे।

वहीं बिहार से गिरफ्तार आरोपी नवीन यादव पर एक अलग तरीके से ठगी करने का आरोप है। पुलिस जांच में पता चला है कि वह परीक्षा शुल्क रिफंड कराने का झांसा देकर छात्रों से उनकी लॉगिन आईडी और अन्य जानकारी हासिल करता था। इसके बाद वह छात्रों के अकाउंट का पासवर्ड बदल देता था और उनके खाते पर नियंत्रण कर लेता था।साइबर क्राइम ब्रांच का कहना है कि आरोपी तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल कर छात्रों को निशाना बना रहे थे। जांच के दौरान कई टेलीग्राम चैनल, वेबसाइट और डिजिटल लेन-देन से जुड़े अहम सबूत भी मिले हैं। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी हुई है।

अधिकारियों ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी परीक्षा का पेपर लीक होने या उपलब्ध कराने के दावों पर विश्वास न करें। किसी भी अनजान वेबसाइट, टेलीग्राम चैनल या सोशल मीडिया अकाउंट को पैसे भेजने से पहले उसकी सत्यता की जांच अवश्य करें।साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान इस तरह के गिरोह सक्रिय हो जाते हैं और छात्रों की चिंता तथा जल्द सफलता पाने की इच्छा का फायदा उठाते हैं। ऐसे मामलों में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है। फिलहाल पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस नेटवर्क का विस्तार कितने राज्यों तक फैला हुआ है तथा अब तक कुल कितनी रकम की ठगी की गई है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना भी जताई जा रही है।