2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारी में हाईटेक बना अहमदाबाद, AI तकनीक से खिलाड़ियों को मिल रही आधुनिक ट्रेनिंग
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स की तैयारियों को लेकर देशभर में खेल ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी दिशा में अहमदाबाद का Vijay Bharti Foundation एथलीटों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI और आधुनिक तकनीकों की मदद से प्रशिक्षित कर रहा है। यह पहल खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने और उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में अहम मानी जा रही है।
फाउंडेशन में खिलाड़ियों की ट्रेनिंग अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर डिजिटल और डेटा आधारित हो चुकी है। एथलीट AI तकनीक की मदद से अपने खेल प्रदर्शन का गहराई से विश्लेषण कर रहे हैं। इसके जरिए खिलाड़ी अपनी फिटनेस, स्पीड, स्टैमिना, मूवमेंट और तकनीकी कमजोरियों को बेहतर तरीके से समझ पा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डेटा आधारित प्रशिक्षण खिलाड़ियों को व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार ट्रेनिंग देने में मदद करता है।
AI तकनीक के इस्तेमाल से हर खिलाड़ी का अलग-अलग डेटा तैयार किया जा रहा है, जिसके आधार पर उन्हें व्यक्तिगत प्रशिक्षण कार्यक्रम दिए जाते हैं। इससे खिलाड़ियों की क्षमता के अनुसार अभ्यास कराया जा रहा है और उनकी कमजोरियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। माना जा रहा है कि यह तकनीक भविष्य में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन को नई ऊंचाई तक पहुंचा सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार, AI आधारित प्रशिक्षण का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे खिलाड़ियों में चोट लगने का खतरा कम होता है। आधुनिक सेंसर और डेटा ट्रैकिंग तकनीक शरीर की गतिविधियों पर लगातार नजर रखती है। यदि किसी खिलाड़ी के शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव पड़ रहा हो या चोट की संभावना हो, तो सिस्टम पहले ही संकेत दे देता है। इससे कोच समय रहते ट्रेनिंग में बदलाव कर सकते हैं और खिलाड़ी गंभीर चोटों से बच सकते हैं।
अहमदाबाद में शुरू की गई यह पहल भारत के खेल क्षेत्र में तकनीकी बदलाव का बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। खेल विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के कई विकसित देशों में पहले से AI आधारित स्पोर्ट्स ट्रेनिंग का इस्तेमाल हो रहा है और अब भारत भी तेजी से इस दिशा में आगे बढ़ रहा है।
इसके साथ ही केंद्र सरकार की Khelo India पहल के तहत भी AI तकनीक का उपयोग युवा प्रतिभाओं की पहचान के लिए किया जा रहा है। विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं और प्रशिक्षण शिविरों के दौरान खिलाड़ियों के प्रदर्शन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। इससे प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को शुरुआती स्तर पर पहचानकर उन्हें बेहतर प्रशिक्षण और संसाधन उपलब्ध कराए जा सकते हैं।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI और आधुनिक तकनीक भारतीय खेल जगत की तस्वीर बदल सकती है। यदि खिलाड़ियों को सही समय पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिले, तो भारत अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
2030 कॉमनवेल्थ गेम्स को ध्यान में रखते हुए इस तरह की पहलें खिलाड़ियों के आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों को मजबूत कर रही हैं। माना जा रहा है कि तकनीक और खेल के इस मेल से भारत वैश्विक खेल मंच पर नई पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।