Ahmedabad Guinness World Record: अहमदाबाद ने बनाया वृक्षारोपण का रिकॉर्ड, एक घंटे में लगाए 3.61 लाख पौधे; जानिए क्या है मियावाकी तकनीक
गुजरात के अहमदाबाद शहर ने पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अहमदाबाद नगर निगम (AMC) ने वृक्षारोपण के क्षेत्र में गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है। शहर के भदाज इलाके में मियावाकी तकनीक के जरिए सिर्फ एक घंटे में 3.61 लाख पौधे लगाए गए। इस ऐतिहासिक अभियान को सफल बनाने में 25 हजार से ज्यादा स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
इतनी बड़ी संख्या में पौधारोपण कम समय में कैसे संभव हुआ, इसे लेकर लोगों में उत्सुकता है। इसका जवाब जापान की प्रसिद्ध मियावाकी तकनीक में छिपा है, जो कम जगह में तेजी से जंगल तैयार करने की आधुनिक पद्धति मानी जाती है।
क्या है मियावाकी तकनीक?
मियावाकी तकनीक जापानी वनस्पति वैज्ञानिक अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित की गई एक पद्धति है। इस तकनीक में कम क्षेत्रफल में बड़ी संख्या में स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए जाते हैं।
इसमें पौधों को सामान्य वृक्षारोपण की तुलना में काफी करीब-करीब लगाया जाता है। पौधों के बीच कम दूरी होने के कारण वे तेजी से ऊपर की ओर बढ़ते हैं और एक-दूसरे को सहारा देते हैं।
इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य कम समय में घना जंगल तैयार करना है। सामान्य तौर पर जहां पेड़ों को बड़ा होने में कई दशक लग सकते हैं, वहीं मियावाकी तकनीक से कुछ वर्षों में घना हरित क्षेत्र विकसित किया जा सकता है।
एक घंटे में इतने पौधे कैसे लगाए गए?
अहमदाबाद में इस रिकॉर्ड को हासिल करने के लिए बड़े स्तर पर पहले से तैयारी की गई थी। पौधों की व्यवस्था, जमीन की तैयारी और स्वयंसेवकों की टीमों को अलग-अलग जिम्मेदारियां दी गई थीं।
25 हजार से अधिक स्वयंसेवकों को निर्धारित स्थानों पर तैनात किया गया। पौधों को पहले से तय स्थानों पर पहुंचाया गया था, जिससे अभियान के दौरान समय की बचत हुई।
मियावाकी तकनीक में पौधों को छोटे-छोटे हिस्सों में तेजी से लगाया जाता है। बड़ी संख्या में लोगों के एक साथ काम करने से कुछ ही समय में लाखों पौधे लगाए जा सके।
पर्यावरण के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह तकनीक?
मियावाकी तकनीक से तैयार किए गए जंगल पर्यावरण के लिए कई तरह से फायदेमंद होते हैं। ये क्षेत्र हवा को शुद्ध करने, कार्बन उत्सर्जन कम करने और जैव विविधता बढ़ाने में मदद करते हैं।
शहरों में जहां हरियाली के लिए जगह कम होती जा रही है, वहां यह तकनीक छोटे क्षेत्रों में भी घने जंगल विकसित करने का विकल्प देती है।
इसके अलावा ऐसे हरित क्षेत्र तापमान नियंत्रित करने और शहरी इलाकों में बढ़ती गर्मी को कम करने में भी सहायक हो सकते हैं।
अहमदाबाद की बड़ी पर्यावरणीय पहल
AMC की यह पहल शहर में हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच ऐसे प्रयास लोगों को प्रकृति से जोड़ने और पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ अहमदाबाद ने यह संदेश भी दिया है कि बड़े स्तर पर सामूहिक प्रयासों से पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। आने वाले समय में मियावाकी जैसे मॉडल देश के अन्य शहरों में भी अपनाए जाने की उम्मीद है।