क्या आप जानते हैं? भारत के इस राज्य में नहीं लगता Income Tax, वजह जानकर रह जाएंगे हैरान
भारत में इनकम टैक्स फाइल करने का समय जैसे-जैसे पास आता है, लोग अपने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) के पास भागने लगते हैं और टैक्स बचाने के तरीके खोजने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसा राज्य भी है जहाँ के स्थानीय निवासियों को इनकम टैक्स के तौर पर एक रुपया भी नहीं देना पड़ता? हाँ! हम सिक्किम के खूबसूरत राज्य की बात कर रहे हैं। आइए समझते हैं कि सिक्किम के लोगों को यह खास छूट क्यों मिलती है और इसके पीछे का कानूनी आधार क्या है।
सिक्किम के लोगों को टैक्स क्यों नहीं देना पड़ता?
इसके पीछे कोई नई सरकारी योजना नहीं, बल्कि हमारे देश का इतिहास और संविधान है। सिक्किम पहले एक स्वतंत्र राज्य था (जहाँ चोग्याल वंश का शासन था)। 1975 में एक जनमत संग्रह के बाद यह भारत का 22वां राज्य बना।
जब सिक्किम का भारत में विलय हुआ, तो स्थानीय लोगों के मौजूदा कानूनों, रीति-रिवाजों और अधिकारों की रक्षा के लिए संविधान में अनुच्छेद 371F जोड़ा गया। इस अनुच्छेद के तहत, सिक्किम को कई विशेष अधिकार दिए गए, जिनमें उसकी पहले से चली आ रही टैक्स व्यवस्था को बनाए रखना भी शामिल था। बाद में, इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में धारा 10(26AAA) जोड़ी गई। इस प्रावधान ने कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त सिक्किमी निवासियों की आय को इनकम टैक्स से पूरी तरह छूट दे दी।
क्या सिक्किम में रहने वाले सभी लोगों को टैक्स में छूट मिलती है?
बिल्कुल नहीं! यह एक आम गलतफहमी है; टैक्स में छूट केवल उन लोगों को मिलती है जो कानूनी रूप से "सिक्किमी" की परिभाषा में आते हैं - खास तौर पर वे व्यक्ति या उनके वंशज जिनके नाम भारत में सिक्किम के विलय से पहले के ऐतिहासिक रजिस्टरों में दर्ज हैं। अगर किसी दूसरे राज्य (जैसे यूपी, बिहार या दिल्ली) का कोई व्यक्ति बिजनेस या काम करने के लिए सिक्किम जाता है, तो उन पर सामान्य भारतीय टैक्स कानून लागू होते हैं, और उन्हें इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना होता है। आसान शब्दों में कहें तो, यह छूट सिक्किम में रहने वाले सभी लोगों के लिए नहीं है; बल्कि यह विलय के समय राज्य के मूल निवासियों से किए गए वादे पर आधारित है।