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यशवंत सिन्हा ने कहा- मोदी का इकबाल खत्म हो गया, अब सरकार की बात नहीं सुनी जाएगी
 

 

एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर देश की राजनीति में जारी घमासान के बीच पूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के पूर्व नेता यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। एक इंटरव्यू में सिन्हा ने कहा कि अगर किसी सरकार या प्रशासन का इकबाल खत्म हो जाए तो उसके लिए व्यवस्था को प्रभावी ढंग से चलाना मुश्किल हो जाता है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वह प्रभाव अब पहले जैसा नहीं रहा।

'इकबाल खत्म हुआ तो काम करना मुश्किल'

यशवंत सिन्हा ने अपने लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि किसी पद की ताकत केवल कुर्सी से नहीं होती, बल्कि उस पद के प्रति लोगों के भरोसे और सम्मान से होती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री या अधिकारी का इकबाल खत्म हो जाए तो उसके आदेशों का असर भी कम हो जाता है।

सिन्हा ने बिहार में कलेक्टर रहते हुए अपने अनुभव का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने एक मुख्यमंत्री से भी पद की गरिमा और उसके इकबाल को लेकर बात की थी। उनका कहना था कि व्यक्ति आज कुर्सी पर है और कल नहीं होगा, लेकिन संस्थान की प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए।

नोटबंदी और कोरोना का भी दिया उदाहरण

यशवंत सिन्हा ने प्रधानमंत्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान लिए गए बड़े फैसलों का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय सरकार के आह्वान पर लोग बड़ी संख्या में सामने आते थे। उन्होंने नोटबंदी के दौरान लोगों के बैंकों के बाहर लंबी कतारों में खड़े होने और कोरोना काल में प्रधानमंत्री की अपील पर थाली-ताली बजाने का उदाहरण दिया।सिन्हा के मुताबिक, उस समय प्रधानमंत्री की अपील का व्यापक असर दिखाई देता था। उन्होंने इसी को 'इकबाल' से जोड़ते हुए कहा कि अब परिस्थितियों में बदलाव आया है।

ज्ञानेश कुमार को लेकर भी उठाए सवाल

यशवंत सिन्हा ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी नियुक्ति के समय संविधान के प्रति निष्ठा की शपथ लेते हैं और उनका दायित्व किसी एक सरकार या राजनीतिक दल के प्रति नहीं, बल्कि संविधान के प्रति होता है।उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ अधिकारी राजनीतिक सत्ता के साथ समझौता करते हैं, क्योंकि उन्हें महत्वपूर्ण पद मिलने की उम्मीद रहती है। हालांकि ये सिन्हा के आरोप और राजनीतिक दावे हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि उन्होंने अपने बयान में प्रस्तुत नहीं की।

2024 के लोकसभा चुनाव का भी किया जिक्र

सिन्हा ने 2024 के लोकसभा चुनाव के नतीजों का हवाला देते हुए कहा कि भाजपा 2019 में 303 सीटों से घटकर 2024 में 240 सीटों पर आ गई। उनके मुताबिक, इस बदलाव के बाद पार्टी के भीतर चुनावी रणनीति को लेकर नए सिरे से विचार हुआ।उन्होंने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए और दावा किया कि चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है। ये आरोप विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे व्यापक राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं। चुनाव आयोग और भाजपा इन तरह के आरोपों को खारिज करते रहे हैं।फिलहाल एसआईआर और चुनाव आयोग को लेकर विपक्षी दलों का विरोध जारी है। इसी राजनीतिक माहौल में यशवंत सिन्हा का प्रधानमंत्री मोदी के 'इकबाल' को लेकर दिया गया बयान चर्चा में आ गया है।