जमीन विवाद में अटके प्रोजेक्टों को मिलेगी रफ्तार, छोटे प्लॉट पर ग्रुप हाउसिंग की योजना बनाएगा यमुना प्राधिकरण
ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में जमीन विवाद के कारण लंबे समय से अटके ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों को पूरा कराने के लिए यमुना प्राधिकरण ने नई योजना पर काम शुरू कर दिया है। प्राधिकरण अब छोटे आकार के भूखंडों पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित करने की योजना तैयार कर रहा है। इसका उद्देश्य जमीन से जुड़े विवादों के कारण परियोजनाओं में होने वाली देरी को कम करना और आवासीय योजनाओं को समय पर पूरा कराना है।
जमीन विवाद बन रहे प्रोजेक्टों की राह में रोड़ा
यमुना प्राधिकरण क्षेत्र में कई आवासीय परियोजनाएं जमीन से जुड़े विवादों के कारण प्रभावित हुई हैं। जमीन के अधिग्रहण, किसानों के मुआवजे और अन्य विवादों के चलते बिल्डरों को परियोजनाओं के लिए पूरी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाती। इसका सीधा असर प्रोजेक्ट की निर्माण गति और घर खरीदारों पर पड़ता है।
कई परियोजनाओं के लंबे समय तक अटके रहने से खरीदारों को भी अपने घर का इंतजार करना पड़ता है। इसी समस्या का समाधान तलाशने के लिए प्राधिकरण अब ग्रुप हाउसिंग के लिए नई रणनीति पर विचार कर रहा है।
छोटे प्लॉट पर शुरू होंगे प्रोजेक्ट
नई योजना के तहत बड़े भूखंडों के बजाय छोटे आकार के प्लॉट पर ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि छोटे भूखंड होने से जमीन संबंधी विवादों का असर सीमित किया जा सकेगा और परियोजनाओं के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध कराने में आसानी होगी।
इसके अलावा छोटे प्लॉट पर परियोजना शुरू होने से निर्माण कार्य को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है। इससे परियोजनाओं को समय पर पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
घर खरीदारों को मिल सकती है राहत
ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्टों के समय पर पूरा नहीं होने का सबसे बड़ा असर घर खरीदारों पर पड़ता है। लंबे समय तक निर्माण अटका रहने से खरीदारों की आर्थिक योजना प्रभावित होती है और उन्हें किराए के मकान में रहने का अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ सकता है।
यमुना प्राधिकरण की नई योजना सफल रहती है तो भविष्य में जमीन विवाद के कारण प्रोजेक्टों के अटकने की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इससे क्षेत्र में आवासीय परियोजनाओं को गति मिलने के साथ खरीदारों को भी समय पर घर मिलने की उम्मीद बढ़ेगी।
प्राधिकरण तैयार कर रहा नई रणनीति
यमुना प्राधिकरण की कोशिश है कि आवासीय परियोजनाओं के लिए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें जमीन की उपलब्धता और विवादों को ध्यान में रखते हुए परियोजनाओं को आगे बढ़ाया जा सके। छोटे भूखंडों पर ग्रुप हाउसिंग की योजना इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अब देखना होगा कि प्राधिकरण इस योजना को किस स्वरूप में लागू करता है और इसके लिए किस तरह के नियम और शर्तें तय की जाती हैं। यदि योजना लागू होती है तो जमीन विवादों के कारण अटके प्रोजेक्टों को गति देने के साथ यमुना क्षेत्र में नए आवासीय प्रोजेक्टों के विकास का रास्ता भी साफ हो सकता है।