पश्चिमी विक्षोभ ने दिल्ली-एनसीआर में मौसम का मिज़ाज बदल दिया: बारिश, कोहरा और शीतलहर का कहर
दिल्ली-एनसीआर और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में मौसम ने फिर एक अचानक करवट ली है। इसके पीछे पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता मुख्य वजह है, जिसने कश्मीर और हिमाचल प्रदेश की वादियों को सफेद बर्फ की चादर से ढक दिया है। इस बर्फबारी का असर अब राजधानी दिल्ली में भी महसूस होने लगा है, जिससे शीतलहर और ठंड की मार लोगों पर भारी पड़ रही है।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ एक ऐसा मौसमी सिस्टम है, जो हिमालय क्षेत्र में दबाव के बदलाव के कारण सक्रिय होता है। इसके चलते पहाड़ों में भारी बर्फबारी होती है और मैदानी क्षेत्रों में बेमौसम बारिश, कोहरा और ठंडक बढ़ जाती है। यही कारण है कि दिल्ली‑एनसीआर में पिछले कुछ दिनों से चली आ रही सूखी और हल्की ठंड अचानक बदलकर तेज़ शीतलहर में बदल गई।
राजधानी में शुक्रवार की सुबह से ही घना कोहरा और ठंडी हवाओं का असर देखा गया। तापमान में तेज़ गिरावट दर्ज की गई और कई इलाकों में बारिश भी हुई। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली में न्यूनतम तापमान कई स्थानों पर सामान्य से 3-4 डिग्री कम रिकॉर्ड किया गया, जिससे राजधानीवासियों को ठंडक का अहसास हुआ।
कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बर्फबारी ने सफेद मौसम का जादू बिखेर दिया। शोपियां, गिलगिट, मनाली और शिमला जैसे प्रमुख हिल स्टेशनों में बर्फ ने सड़कें और घरों की छतों को ढक दिया। इस बर्फबारी ने पर्यटन स्थलों को एक सुवर्ण अवसर दिया, लेकिन स्थानीय लोगों और यातायात के लिए यह चुनौती भी बन गई।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ दिनों तक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रह सकता है, जिससे दिल्ली‑एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में बार-बार ठंडक, बारिश और कोहरे का सामना करना पड़ सकता है। इसके चलते लोगों से सलाह दी गई है कि सड़क पर सावधानी बरतें, बच्चों और बुजुर्गों को ठंड से बचाएं और मौसम की ताजा जानकारी लेते रहें।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मौसम परिवर्तन जलवायु अस्थिरता और मौसमी बदलाव का संकेत है। हिमालय में बर्फबारी और मैदानी क्षेत्रों में बारिश का यह संगम न केवल तापमान में उतार-चढ़ाव ला रहा है, बल्कि स्वास्थ्य, यातायात और दैनिक जीवन पर भी असर डाल रहा है।
कुल मिलाकर, पश्चिमी विक्षोभ के कारण दिल्ली और आसपास के मैदानी क्षेत्रों में शीतलहर लौट आई है, जबकि कश्मीर और हिमाचल में बर्फ ने सफेद सबूत छोड़ दिया है। यह मौसम का ताजगी भरा परिवर्तन लोगों को याद दिलाता है कि उत्तर भारत में हिमालय और मैदानी इलाकों के बीच मौसम का गहरा संबंध है और इसके प्रभावों के लिए हमेशा सतर्क रहने की आवश्यकता है।