मुस्लिम देशों में भारत का यह देश सबसे भरोसेमंद साझेदार माना जाता है, ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में भी साथ खड़े होने की चर्चा
मध्य पूर्व और मुस्लिम देशों के साथ भारत के रिश्ते पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और सुरक्षा साझेदारी के बीच कुछ देशों को भारत का बेहद भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार माना जाता है। इन्हीं में से एक देश United Arab Emirates को लेकर हाल के दिनों में फिर चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट्स और कूटनीतिक विश्लेषणों के अनुसार, यूएई भारत के उन चुनिंदा साझेदारों में शामिल है जिनके साथ रिश्ते केवल व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सुरक्षा और रणनीतिक सहयोग तक विस्तारित हैं।
भारत-यूएई रिश्तों में लगातार मजबूती
भारत और यूएई के बीच पिछले दशक में व्यापारिक और निवेश संबंधों में भारी बढ़ोतरी हुई है। दोनों देशों के बीच ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और रक्षा सहयोग के कई समझौते हुए हैं। यूएई में रहने वाले लाखों भारतीय प्रवासी भी इस रिश्ते की एक मजबूत कड़ी माने जाते हैं, जो दोनों देशों की अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाते हैं।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ को लेकर चर्चा
हाल ही में सामने आए कथित “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर भी यह दावा किया जा रहा है कि कुछ परिस्थितियों में यूएई ने भारत को अप्रत्यक्ष समर्थन दिया था। हालांकि इस ऑपरेशन से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सीमित है, लेकिन डिप्लोमैटिक हलकों में इसे भारत-यूएई सहयोग के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में देशों का सहयोग अक्सर खुफिया जानकारी, लॉजिस्टिक सपोर्ट या कूटनीतिक स्तर पर होता है, जिसे सार्वजनिक रूप से विस्तार से साझा नहीं किया जाता।
मुस्लिम देशों में बदलता भारत का प्रभाव
पिछले कुछ वर्षों में भारत की विदेश नीति में खाड़ी देशों के साथ संबंधों को विशेष प्राथमिकता दी गई है। इसके परिणामस्वरूप:
- व्यापारिक समझौते बढ़े हैं
- निवेश के नए अवसर खुले हैं
- सुरक्षा सहयोग मजबूत हुआ है
- ऊर्जा क्षेत्र में निर्भरता और साझेदारी बढ़ी है
इन सभी कारणों से कई मुस्लिम देशों में भारत की छवि एक मजबूत और भरोसेमंद साझेदार के रूप में उभरी है।
कूटनीतिक विशेषज्ञों की राय
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और यूएई जैसे देशों के बीच संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि आर्थिक जरूरतों और आपसी हितों पर आधारित हैं। यही कारण है कि दोनों देश संकट की स्थिति में भी एक-दूसरे के साथ सहयोग करते नजर आते हैं।
रणनीतिक साझेदारी का बढ़ता दायरा
आज भारत और यूएई के रिश्ते सिर्फ ऊर्जा या व्यापार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि साइबर सुरक्षा, आतंकवाद विरोध, और तकनीकी सहयोग जैसे क्षेत्रों तक फैल चुके हैं। इस बढ़ते सहयोग को दोनों देशों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।