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सुप्रीम कोर्ट का अहम फैसला: बेटी के भरण-पोषण मामले में मां की अपील खारिज, बच्चे के हित को बताया सर्वोपरि

 

सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई करते हुए बेटी को भरण-पोषण (maintenance) देने से इनकार किए जाने को चुनौती देने वाली मां की अपील को खारिज कर दिया है। यह फैसला न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति नोंगमेइकापम कोटिश्वर सिंह की पीठ ने सुनाया।

मामला परिवारिक विवाद से जुड़ा था, जिसमें मां ने निचली अदालत के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें बेटी के भरण-पोषण के दावे को स्वीकार नहीं किया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के बाद अपील को खारिज कर दिया।

फैसले के दौरान अदालत ने स्पष्ट किया कि हर मामले में कानूनी पहलुओं के साथ-साथ परिस्थितियों को भी ध्यान में रखा जाता है। हालांकि, इस केस में अपील खारिज कर दी गई, लेकिन पीठ ने यह भी चिंता जताई कि इस पूरे विवाद का सीधा असर बच्चे पर पड़ा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी भी पारिवारिक विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष बच्चे की भलाई होती है और उसे प्राथमिकता देना आवश्यक है। अदालत ने यह भी संकेत दिया कि माता-पिता के बीच चल रहे विवादों का प्रभाव बच्चों के मानसिक और भावनात्मक विकास पर नहीं पड़ना चाहिए।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह रुख यह दर्शाता है कि पारिवारिक मामलों में अदालतें केवल कानूनी तकनीकी पहलुओं पर ही नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और बच्चों के सर्वोत्तम हित को भी ध्यान में रखती हैं।

फिलहाल इस फैसले के बाद मामले में कानूनी स्थिति स्पष्ट हो गई है, लेकिन अदालत की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि पारिवारिक विवादों में बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य को कैसे बेहतर तरीके से संरक्षित किया जाए।