सुप्रीम कोर्ट का पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध से इनकार, कहा- न पूर्ण रोक होगी और न ही अनियंत्रित इस्तेमाल की अनुमति
देश में पटाखों के इस्तेमाल और वायु प्रदूषण को लेकर जारी बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने इस साल पटाखों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने से इनकार किया है। शीर्ष अदालत ने 30 सितंबर को स्पष्ट किया था कि पटाखों पर न तो पूरी तरह रोक लगाई जाएगी और न ही इनके अनियंत्रित इस्तेमाल की अनुमति दी जाएगी। अदालत के इस रुख के बाद त्योहारों के दौरान पटाखों के इस्तेमाल और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
पटाखों पर संतुलित रुख अपनाने की बात
सुप्रीम कोर्ट ने अपने रुख में पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध और उनके बिना किसी नियंत्रण के इस्तेमाल, दोनों स्थितियों से अलग रास्ता अपनाने की बात कही। इसका उद्देश्य त्योहारों के दौरान लोगों की परंपराओं और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों के बीच संतुलन बनाना है।पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे क्षेत्रों में पहले से मौजूद प्रदूषण के बीच पटाखों का इस्तेमाल चिंता का विषय रहता है। ऐसे में अदालत के निर्देशों के तहत पटाखों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने और प्रदूषण कम करने के उपाय महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
प्रदूषण नियंत्रण पर भी जोर
दिल्ली-एनसीआर में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण का स्तर अक्सर बढ़ जाता है। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल, औद्योगिक उत्सर्जन और मौसम संबंधी परिस्थितियां इसके प्रमुख कारणों में शामिल हैं। त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाला अतिरिक्त उत्सर्जन भी वायु गुणवत्ता पर असर डाल सकता है।ऐसे में प्रदूषण नियंत्रण के लिए केवल पटाखों से संबंधित नियम ही नहीं, बल्कि अन्य स्रोतों से होने वाले उत्सर्जन पर भी ध्यान देना जरूरी है। प्रशासन की जिम्मेदारी होती है कि वह अदालत के निर्देशों और लागू नियमों के अनुसार प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री, भंडारण और इस्तेमाल पर निगरानी रखे।
नियमों के तहत ही इस्तेमाल की अनुमति
सुप्रीम कोर्ट के रुख का अर्थ यह नहीं है कि सभी प्रकार के पटाखों को हर जगह और किसी भी समय इस्तेमाल करने की खुली छूट मिल गई है। पटाखों के इस्तेमाल पर लागू प्रतिबंध, समय-सीमा और अन्य शर्तों का पालन करना जरूरी है। संबंधित राज्य सरकारों और प्रशासन की ओर से जारी निर्देश भी महत्वपूर्ण होंगे।नागरिकों को पटाखे खरीदने और इस्तेमाल करने से पहले अपने क्षेत्र में लागू नियमों की जानकारी लेनी चाहिए। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने से इनकार करते हुए उनके अनियंत्रित इस्तेमाल को भी स्वीकार नहीं किया है। अदालत का रुख त्योहारों के दौरान पटाखों के इस्तेमाल और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखने पर केंद्रित है।