हवाई किरायों में भारी अंतर पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, वीडियो में समझें दो एयरलाइन, एक का किराया 8000 दूसरी का 18000 क्योँ
सुप्रीम कोर्ट ने देश में अलग-अलग एयरलाइनों द्वारा एक ही रूट और एक ही दिन के लिए अलग-अलग हवाई किराया वसूलने के मुद्दे पर चिंता जताई है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि एक ही सेक्टर में उड़ान भरने वाली एयरलाइनों के किरायों में बड़ा अंतर देखने को मिलता है, जिसे नियंत्रित करने की जरूरत है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप कर यात्रियों को राहत देने को कहा है।
यह टिप्पणी जस्टिस Vikram Nath और जस्टिस Sandeep Mehta की बेंच ने सुनवाई के दौरान की। अदालत सोशल एक्टिविस्ट S Lakshminarayanan द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी।
याचिका में मांग की गई है कि देश में एक मजबूत और स्वतंत्र रेगुलेटरी संस्था बनाई जाए, जो एयरलाइनों के किराए और यात्रियों से लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों की निगरानी करे। याचिकाकर्ता का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में एयरलाइंस मनमाने तरीके से टिकट कीमतें तय कर रही हैं, जिससे आम यात्रियों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अक्सर देखा जाता है कि एक ही दिन और एक ही रूट पर अलग-अलग एयरलाइंस के टिकट दामों में काफी बड़ा अंतर होता है। इतना ही नहीं, कई बार एक ही एयरलाइन कुछ घंटों के भीतर किराया कई गुना बढ़ा देती है। अदालत ने कहा कि यह स्थिति यात्रियों के लिए भ्रम और परेशानी पैदा करती है।
बेंच ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या हवाई किरायों को लेकर कोई प्रभावी निगरानी तंत्र मौजूद है। कोर्ट ने यह भी कहा कि एयर ट्रैवल अब केवल अमीरों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि बड़ी संख्या में मध्यम वर्ग और आम लोग भी इसका इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में किराया निर्धारण में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
याचिका में एयरलाइंस द्वारा लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्कों का मुद्दा भी उठाया गया। इसमें सीट चयन शुल्क, सामान शुल्क, सुविधा शुल्क और अंतिम समय में टिकट रद्द करने पर भारी कटौती जैसे मामलों को शामिल किया गया है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कई बार टिकट की मूल कीमत कम दिखाई जाती है, लेकिन बाद में अतिरिक्त चार्ज जोड़कर यात्रियों से ज्यादा रकम वसूली जाती है।
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद देश में एयरलाइन कंपनियों की किराया नीति पर बहस तेज हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस दिशा में कोई सख्त रेगुलेटरी व्यवस्था लागू करती है, तो यात्रियों को राहत मिल सकती है और टिकट बुकिंग प्रक्रिया ज्यादा पारदर्शी बन सकती है।
फिलहाल अदालत ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है और संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस मुद्दे पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। अब यात्रियों की नजर सरकार और एविएशन रेगुलेटरी संस्थाओं की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।