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दिल्ली-एनसीआर में ‘गर्मियों का प्रदूषण’ बना नई चुनौती: 46°C से ज्यादा तापमान के साथ बढ़ा स्वास्थ्य संकट

 

दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ते तापमान ने हालात और गंभीर कर दिए हैं। क्षेत्र में तापमान 46 डिग्री सेल्सियस से अधिक पहुंचने के बीच अब एक नई पर्यावरणीय चुनौती सामने आई है, जिसे विशेषज्ञ ‘गर्मियों का प्रदूषण’ बता रहे हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से पीएम10 धूल कणों और ग्राउंड-लेवल ओजोन के बढ़ते स्तर के कारण उत्पन्न हो रही है। तेज धूप, गर्म हवाएं और वाहनों से निकलने वाले प्रदूषक मिलकर इस अदृश्य प्रदूषण को और खतरनाक बना रहे हैं।

मौसम और पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मियों में ओजोन गैस का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, जो सांस संबंधी बीमारियों, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं को बढ़ा सकता है। वहीं पीएम10 धूल कण हवा की गुणवत्ता को और खराब कर देते हैं।

दिल्ली-एनसीआर में पहले से ही वायु प्रदूषण एक बड़ी समस्या रही है, लेकिन गर्मियों में इसका स्वरूप बदलकर और अधिक जटिल हो जाता है। तेज गर्मी के कारण रासायनिक प्रतिक्रियाएं तेज होती हैं, जिससे प्रदूषण का असर बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दोपहर के समय बाहर निकलने से बचने, मास्क पहनने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।

प्रशासन और पर्यावरण एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि दीर्घकालिक समाधान के लिए प्रदूषण नियंत्रण और हरित क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है।