छात्र प्रदर्शन हिंसा मामला: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्देश, पीड़ितों की ओर से पेश सामग्री की भी जांच करेगी कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान हुई हिंसा से जुड़े मामले में जांच प्रक्रिया को लेकर अहम निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि पीड़ितों की ओर से याचिकाकर्ताओं द्वारा जमा कराई गई सामग्री की भी जांच की जानी चाहिए। इससे जांच कमेटी के सामने पीड़ित पक्ष के वीडियो और अन्य साक्ष्य रखने का रास्ता साफ हुआ है।
सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि जांच केवल एक पक्ष की शिकायतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से पीड़ितों के समर्थन में जो दस्तावेज, वीडियो क्लिप और अन्य साक्ष्य जमा किए गए हैं, उन्हें भी जांच कमेटी के सामने रखा जाए। कमेटी को दोनों पक्षों से मिले तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार करनी होगी।
जंतर-मंतर पर जुलाई में हुए प्रदर्शन से जुड़ा है मामला
यह मामला जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से कथित तौर पर अत्यधिक बल प्रयोग किए जाने और प्रदर्शनकारियों की ओर से पुलिसकर्मियों पर हमला करने के आरोप लगे थे। दोनों पक्षों की शिकायतों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मामले की स्वतंत्र जांच के लिए पांच सदस्यीय हाई पावर इन्क्वायरी कमेटी (HPEC) गठित की थी।
पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज की अध्यक्षता में बनी कमेटी
इस कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। कमेटी को प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई, कथित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार, पुलिसकर्मियों को लगी चोटों और सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान जैसे पहलुओं की जांच करनी है।
दोनों पक्षों के साक्ष्यों की होगी जांच
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को निर्देश दिया है कि वह प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों, दोनों पक्षों से जुड़े आरोपों की निष्पक्षता से जांच करे। पीड़ितों की ओर से उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों को भी रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर कमेटी तकनीकी और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ले सकती है।इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच आगे बढ़ रही है। अब कमेटी की रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रदर्शन के दौरान किन परिस्थितियों में हिंसा हुई और किन लोगों या अधिकारियों की भूमिका सामने आती है।