किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना पर छह राज्यों का गतिरोध खत्म, 1457 एमयू बिजली का होगा उत्पादन
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध अब खत्म हो गया है। छह राज्यों के बीच परियोजना को लेकर बनी सहमति के बाद इसके आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है। इस परियोजना से हर साल करीब 1457 मिलियन यूनिट यानी एमयू बिजली पैदा होने का अनुमान है। उत्पादित बिजली को उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के बीच साझा किया जाएगा।
किशाऊ बहुउद्देशीय बांध परियोजना को उत्तर भारत की महत्वपूर्ण जलविद्युत परियोजनाओं में शामिल किया जाता है। यह परियोजना टोंस नदी पर प्रस्तावित है और इसका उद्देश्य बिजली उत्पादन के साथ-साथ जल संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है। लंबे समय से राज्यों के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर सहमति नहीं बन पा रही थी, जिसके कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हो रही थी।
अब छह राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। परियोजना से तैयार होने वाली बिजली में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की हिस्सेदारी होगी। करीब 1457 एमयू बिजली उत्पादन होने से दोनों राज्यों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
किशाऊ परियोजना को बहुउद्देशीय परियोजना इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसका उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है। बांध के जरिए जल संसाधनों का प्रबंधन, सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए पानी की उपलब्धता से जुड़े लक्ष्यों को भी पूरा किया जाना है। ऐसे में परियोजना को क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परियोजना को लेकर लंबे समय से राज्यों के बीच सहमति नहीं बन पाने के पीछे पानी और बिजली के बंटवारे समेत कई मुद्दे बताए जाते रहे हैं। अब संबंधित राज्यों के बीच सहमति बनने के बाद इन अड़चनों को दूर करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा है। इससे परियोजना के निर्माण और अन्य जरूरी प्रक्रियाओं को गति मिलने की संभावना है।
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए इस परियोजना से बनने वाली बिजली महत्वपूर्ण हो सकती है। दोनों राज्यों में जलविद्युत की अच्छी संभावनाएं हैं और बिजली उत्पादन के लिए नदियों के जल संसाधनों का इस्तेमाल किया जाता है। किशाऊ परियोजना के पूरा होने के बाद ऊर्जा उत्पादन क्षमता में भी इजाफा होने की उम्मीद है।
परियोजना से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए अब संबंधित विभागों और एजेंसियों के स्तर पर आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी। इसमें निर्माण, पर्यावरणीय और तकनीकी मंजूरियों सहित कई चरण शामिल होंगे। परियोजना के वास्तविक निर्माण और बिजली उत्पादन की समयसीमा संबंधित प्रक्रियाओं की प्रगति पर निर्भर करेगी।
छह राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध के समाप्त होने को किशाऊ परियोजना के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। अब परियोजना के क्रियान्वयन की दिशा में आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। 1457 एमयू बिजली उत्पादन की प्रस्तावित क्षमता के साथ यह परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के ऊर्जा क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।