शाहदरा का नत्थू कॉलोनी फ्लाईओवर फिर बनेगा नए सिरे से, जांच में भारी वाहनों के लिए खतरनाक पाया गया
पूर्वी दिल्ली के शाहदरा इलाके में स्थित नत्थू कॉलोनी फ्लाईओवर को एक बार फिर से तोड़कर नए सिरे से बनाए जाने का फैसला किया गया है। सुरक्षा को लेकर कराई गई तकनीकी जांच में यह फ्लाईओवर बड़े और भारी वाहनों के लिए खतरनाक पाया गया है। इसके चलते प्रशासन ने बड़ा निर्णय लेते हुए पिलर और गार्डर को छोड़कर फ्लाईओवर के बाकी सभी हिस्सों को दोबारा बनाने का फैसला किया है।
जानकारी के अनुसार, फ्लाईओवर के दोनों कैरिज-वे को पूरी तरह तोड़कर फिर से निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना पर करीब 125 करोड़ रुपये की लागत आई थी और इसके साथ एक अंडरपास भी बनाया गया था। फ्लाईओवर को करीब साढ़े सात साल पहले यातायात के लिए खोला गया था, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता पर शुरू से ही सवाल उठते रहे।
फ्लाईओवर पर ट्रैफिक शुरू होने के महज छह महीने बाद ही इसके स्लैब गिरने की घटनाएं सामने आने लगी थीं। इससे इलाके में हड़कंप मच गया था और लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं जताई जाने लगी थीं। स्लैब गिरने की घटनाओं के बाद प्रशासन को मजबूरन फ्लाईओवर पर भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाना पड़ा था। तब से यह फ्लाईओवर केवल हल्के वाहनों के लिए ही इस्तेमाल में रहा।
हालिया तकनीकी जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि मौजूदा ढांचा लंबे समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता, खासकर भारी वाहनों के दबाव को झेलने में यह असमर्थ है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया गया है कि केवल पिलर और गार्डर को सुरक्षित मानते हुए उन्हें रखा जाएगा, जबकि सड़क की सतह, स्लैब और अन्य संरचनात्मक हिस्सों को पूरी तरह हटाकर नए सिरे से बनाया जाएगा।
इस फैसले के बाद स्थानीय लोगों में मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोगों का कहना है कि देर से ही सही, लेकिन प्रशासन ने सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सही कदम उठाया है। वहीं कई स्थानीय निवासियों और वाहन चालकों ने सवाल उठाया है कि जब फ्लाईओवर के निर्माण में इतनी बड़ी राशि खर्च हुई थी, तो इतनी कम अवधि में इसके खराब होने की जिम्मेदारी किसकी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला निर्माण गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा हुआ है। सार्वजनिक धन से बने इस फ्लाईओवर पर बार-बार मरम्मत और अब पुनर्निर्माण की जरूरत यह दर्शाती है कि शुरुआती स्तर पर निर्माण में गंभीर खामियां रही होंगी। ऐसे मामलों में संबंधित एजेंसियों और ठेकेदारों की जवाबदेही तय करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल, प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि पुनर्निर्माण कार्य कब से शुरू होगा और इसे पूरा होने में कितना समय लगेगा। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान यातायात को सुचारू रखने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाएगी, ताकि लोगों को अधिक परेशानी न हो।
कुल मिलाकर, नत्थू कॉलोनी फ्लाईओवर का दोबारा निर्माण एक बड़ा और जरूरी फैसला माना जा रहा है। यह न केवल यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है, बल्कि सार्वजनिक निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि नए निर्माण में क्या सबक लिए जाते हैं और क्या भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचा जा