दिल्ली के 736 DDA पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा, 190 हाई रिस्क; सिर्फ 16 में CCTV
दिल्ली विकास प्राधिकरण यानी DDA ने राजधानी के अपने सभी 736 पार्कों का सुरक्षा ऑडिट पूरा कर लिया है। यह ऑडिट उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देश के बाद एक सप्ताह के भीतर किया गया। ऑडिट में 190 पार्कों को हाई रिस्क, 258 को मीडियम रिस्क और 288 पार्कों को लो रिस्क श्रेणी में रखा गया है। इन श्रेणियों के आधार पर पार्कों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए प्राथमिकता तय की जा रही है।
520 पार्कों में अतिरिक्त रोशनी की जरूरत
DDA की ऑडिट रिपोर्ट में पार्कों की रोशनी व्यवस्था को प्रमुख सुरक्षा कमी के तौर पर चिन्हित किया गया है। कुल 520 पार्कों में अतिरिक्त लाइटिंग की जरूरत बताई गई है। इनमें 231 पार्कों में लाइटिंग का काम प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया गया है, जबकि 106 पार्कों में ऑडिट के बाद लाइटिंग से जुड़े काम पूरे किए जा चुके हैं।
इसके अलावा 163 पार्कों में प्रवेश सुरक्षा से जुड़ी कमियां मिली हैं। यहां ऐसे गेटों को लॉक करने की व्यवस्था की जा रही है, जिन्हें आसानी से बंद नहीं किया जा सकता। 115 पार्कों में सुरक्षा संबंधी सूचना बोर्ड लगाए जा चुके हैं, जबकि 484 अतिरिक्त साइन बोर्ड लगाने का काम जारी है।
736 में सिर्फ 16 पार्कों में CCTV कैमरे
सुरक्षा ऑडिट में सबसे महत्वपूर्ण कमियों में CCTV निगरानी की कमी सामने आई है। DDA के 736 पार्कों में फिलहाल सिर्फ 16 पार्कों में CCTV कैमरे लगे हुए हैं। यानी अधिकांश पार्कों में अभी वीडियो निगरानी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऑडिट के आधार पर 323 अतिरिक्त पार्कों में CCTV कैमरे लगाने की पहचान की गई है।
पार्कों की बाउंड्री और ग्रिल से जुड़ी कमियों पर भी काम किया जा रहा है। 399 पार्कों में इस तरह की जरूरत चिन्हित हुई थी, जिनमें से 233 पार्कों में मरम्मत या गायब ग्रिल से संबंधित काम पूरा किया जा चुका है। टॉयलेट और खाली या सुनसान ढांचों के आसपास के संवेदनशील हिस्सों को भी सुधार के लिए चिन्हित किया गया है।
हाई रिस्क पार्कों में बाइक पेट्रोलिंग शुरू
DDA के मुताबिक 245 बड़े पार्कों में रात की गश्त शुरू कर दी गई है। 134 पार्कों में अतिरिक्त सुरक्षा गार्ड या गनमैन की जरूरत चिन्हित की गई है। इसके अलावा सभी 190 हाई रिस्क पार्कों में बाइक पेट्रोलिंग शुरू कर दी गई है।
सुरक्षा गार्डों की निगरानी के लिए 602 पार्कों में बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू की जा चुकी है, जबकि बाकी पार्कों में इसे लागू करने की प्रक्रिया जारी है। स्थानीय पुलिस और बीट अधिकारियों के संपर्क नंबर भी पार्कों के फील्ड स्टाफ को उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि किसी घटना की स्थिति में तेजी से समन्वय किया जा सके।
सेंट्रल मॉनिटरिंग सिस्टम से होगी निगरानी
DDA ने पार्कों में सुरक्षा उपायों की प्रगति पर नजर रखने के लिए सेंट्रल मास्टर ट्रैकर और मॉनिटरिंग डैशबोर्ड तैयार किया है। अधिकारियों की ओर से नियमित निरीक्षण किए जाएंगे। साथ ही रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी RWA के साथ बैठक कर अलग-अलग पार्कों की स्थानीय सुरक्षा समस्याओं की पहचान की जा रही है।
यह सुरक्षा ऑडिट दक्षिण दिल्ली के आस्था कुंज पार्क में एक किशोरी के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद कराया गया। घटना के बाद राजधानी के पार्कों में रोशनी, CCTV, गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे थे। अब DDA ने ऑडिट के आधार पर अलग-अलग पार्कों में सुधार के काम शुरू किए हैं।