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दिल्ली में वायु प्रदूषण नियंत्रण के कारण गोलचक्कर सुंदरीकरण परियोजना में देरी

 

राजधानी में वायु प्रदूषण नियंत्रण के लिए लागू ग्रेप प्रतिबंधों के कारण लोक निर्माण विभाग (PWD) की गोलचक्कर सुंदरीकरण परियोजना में देरी हो गई है। पहले यह परियोजना जनवरी 2026 तक पूरी होने वाली थी, लेकिन अब इसकी नई समय सीमा मार्च 2026 निर्धारित की गई है।

राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों में फैली इस परियोजना का उद्देश्य 40 से अधिक गोलचक्करों को आधुनिक और सौंदर्यपूर्ण रूप देना है। इसके तहत प्रत्येक गोलचक्कर पर कलात्मक लैंडस्केपिंग, आधुनिक लाइटिंग और मूर्तियां लगाई जाएंगी। इसके अलावा, स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए आकर्षक और सुरक्षित स्थान तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है।

वहीं, परियोजना के दौरान कई चुनौतियां और अड़चनें भी सामने आई हैं। अधिकारियों का कहना है कि निर्माण सामग्री की चोरी और परियोजना स्थल पर तोड़फोड़ की घटनाएं कार्य की गति को प्रभावित कर रही हैं। इसके अलावा, ग्रेप प्रतिबंधों के कारण निर्माण कार्यों में समय-सीमा और संसाधनों की सीमित उपलब्धता ने भी देरी को बढ़ाया है।

लोक निर्माण विभाग ने बताया कि वे सुरक्षा बढ़ाने और निगरानी कड़ी करने के उपाय कर रहे हैं, ताकि चोरी और तोड़फोड़ की घटनाओं को रोका जा सके। साथ ही, निर्माण कार्य में शामिल सभी कर्मचारियों और ठेकेदारों को नियमित निर्देश और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने के लिए कहा गया है।

परियोजना के तहत गोलचक्करों को केवल सौंदर्य ही नहीं, बल्कि सुरक्षा और पर्यावरणीय दृष्टिकोण से भी बेहतर बनाया जा रहा है। अधिकारियों ने बताया कि निर्माण सामग्री और डिजाइन के चयन में स्थानीय जलवायु और प्रदूषण नियंत्रण मानकों को ध्यान में रखा गया है।

स्थानीय लोगों और पर्यावरण विशेषज्ञों ने इस पहल की सराहना की है। उनका कहना है कि गोलचक्कर सुंदरीकरण से न केवल शहर की सौंदर्यपूर्ण छवि बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय व्यापार और पर्यटन को भी लाभ मिलेगा। वहीं, कुछ नागरिकों ने परियोजना में हो रही देरी और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों पर चिंता जताई है।

इसके अतिरिक्त, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि परियोजना के सभी चरणों में ग्राहक और नागरिक सुरक्षा सर्वोपरि होगी। गोलचक्कर पर लगाई जाने वाली मूर्तियां और लाइटिंग आधुनिक तकनीक पर आधारित होंगी, जिससे ऊर्जा की बचत और पर्यावरणीय प्रभाव कम हो सके।

इस तरह, दिल्ली की गोलचक्कर सुंदरीकरण परियोजना अब मार्च 2026 तक पूरी होने की उम्मीद है। अधिकारी सुनिश्चित कर रहे हैं कि ग्रेप प्रतिबंध और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद परियोजना के सभी तत्व समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पूरे किए जाएं।