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दिल्ली मेट्रो के कई स्टेशनों के नाम बदले, सांस्कृतिक पहचान को प्राथमिकता: रेखा गुप्ता

 

राजधानी में दिल्ली मेट्रो के कुछ पुराने और नए स्टेशनों के नामों में बदलाव किया गया है। यह निर्णय दिल्ली की मुख्यमंत्री और राज्य नाम प्राधिकरण की चेयरमैन रेखा गुप्ता के नेतृत्व में लिया गया। प्राधिकरण की बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श के बाद कुछ स्टेशनों के नाम परिवर्तित किए गए, जबकि कुछ नाम वैसे ही रखे गए हैं, जैसे दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) में सुझाए गए थे।

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि मेट्रो स्टेशन केवल परिवहन के साधन नहीं हैं, बल्कि वे संबंधित क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। इसलिए नाम परिवर्तन का निर्णय हल्के में नहीं लिया गया, बल्कि हर प्रस्ताव पर गंभीरता से चर्चा और समीक्षा की गई।

सूत्रों के अनुसार, जिन स्टेशनों के नाम बदले गए हैं, उनमें स्थानीय इतिहास, भूगोल और सांस्कृतिक विरासत को ध्यान में रखा गया है। वहीं, जिन स्टेशनों के नाम डीपीआर में पहले से प्रस्तावित थे और जिन पर किसी तरह का विवाद या आपत्ति नहीं थी, उन्हें यथावत रखा गया है।

राज्य नाम प्राधिकरण का मानना है कि सही नामकरण से यात्रियों को इलाके की पहचान समझने में आसानी होती है और स्थानीय समुदाय के साथ भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत होता है। इस प्रक्रिया में संबंधित विभागों और डीएमआरसी से समन्वय कर अंतिम सूची तैयार की गई।

हालांकि, नाम परिवर्तन को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा भी तेज हो गई है। कुछ विपक्षी दलों ने इसे अनावश्यक बदलाव करार दिया है, जबकि समर्थकों का कहना है कि यह कदम सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में सकारात्मक पहल है।

डीएमआरसी की ओर से बताया गया है कि नामों में बदलाव से संबंधित तकनीकी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी की जाएंगी। स्टेशनों पर लगे साइन बोर्ड, नक्शे, डिजिटल डिस्प्ले और घोषणाओं में आवश्यक संशोधन किया जाएगा ताकि यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

फिलहाल नए और संशोधित नामों की आधिकारिक सूची जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन-किन स्टेशनों के नाम बदले गए हैं। प्रशासन का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य दिल्ली की पहचान और सांस्कृतिक विरासत को और सशक्त बनाना है।