दिल्ली में बारिश… बिहार से लेकर उत्तराखंड तक जमकर बरसेंगे बादल, जानें अन्य राज्यों का हाल
मानसून अब देश में अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है, लेकिन विदाई से पहले मौसम एक बार फिर करवट लेता नजर आ रहा है। सितंबर के पहले सप्ताह में देश के कई हिस्सों में औसत से कम बारिश दर्ज की गई है। इस बीच भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने ताजा पूर्वानुमान जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार फिलहाल दो प्रमुख मौसम प्रणालियां सक्रिय हैं, जिनके असर से देश के अलग-अलग हिस्सों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की स्थिति बन सकती है।
मौसम विभाग के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इसके प्रभाव से आसपास के क्षेत्रों में बादल सक्रिय हो सकते हैं और कई इलाकों में बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। कम दबाव वाले क्षेत्र के कारण समुद्र से नमी वाली हवाएं देश के कई हिस्सों तक पहुंचेंगी। इससे विशेष रूप से मध्य और पूर्वी भारत में बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।
इसके साथ ही हिमालयी क्षेत्र में पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय है। पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी क्षेत्रों के साथ उत्तर भारत के कुछ मैदानी इलाकों में भी मौसम प्रभावित हो सकता है। कई जगहों पर तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश होने की संभावना जताई गई है। मौसम प्रणालियों की इस सक्रियता के कारण मानसून की विदाई से पहले बारिश का एक और दौर देखने को मिल सकता है।
सितंबर के पहले सप्ताह में सामान्य से कम बारिश होने के बावजूद आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में बारिश की गतिविधियां बढ़ने का अनुमान है। हालांकि, बारिश का असर सभी राज्यों में एक जैसा नहीं रहेगा। कहीं हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, तो कुछ इलाकों में तेज बारिश के साथ आंधी-तूफान की स्थिति बन सकती है।
मौसम में बदलाव को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। तेज आंधी या बिजली चमकने के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना जरूरी है। किसानों के लिए भी यह मौसम महत्वपूर्ण है, क्योंकि तेज बारिश और हवाओं का असर खेतों में खड़ी फसलों पर पड़ सकता है।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू होने के बावजूद बंगाल की खाड़ी में सक्रिय मौसम प्रणाली बारिश को कुछ समय तक बनाए रख सकती है। ऐसे में आने वाले दिनों में देश के कई हिस्सों में मौसम का मिजाज बदला हुआ नजर आ सकता है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपने क्षेत्र के स्थानीय मौसम अलर्ट पर नजर रखें और खराब मौसम की स्थिति में जरूरी सावधानी बरतें।