राष्ट्रपति भवन में गणतंत्र दिवस रिसेप्शन पर राजनीतिक विवाद, राहुल गांधी के पारंपरिक पटका न पहनने पर भाजपा ने किया हमला
राष्ट्रपति भवन में गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित पारंपरिक ‘एट होम रिसेप्शन’ के दौरान सियासी विवाद खड़ा हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा इस अवसर पर पारंपरिक नॉर्थ-ईस्टर्न पटका न पहनने को लेकर भाजपा ने तीखा हमला बोला। भाजपा नेताओं ने इसे संविधान और राष्ट्रपिता के प्रतीक के अपमान के रूप में करार दिया।
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में आयोजित रिसेप्शन एक राष्ट्रीय और सांस्कृतिक परंपरा है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसी भी राजनीतिक या व्यक्तिगत कारण से परंपरा का उल्लंघन करना अनुचित और असंवेदनशील है। भाजपा नेताओं ने कहा, “यह केवल रस्मों का मामला नहीं है, बल्कि यह देश के प्रति सम्मान का प्रतीक है। इसे नजरअंदाज करना अनुचित है।”
वहीं कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया है। पार्टी ने कहा कि राहुल गांधी ने हमेशा राष्ट्रीय परंपराओं और प्रतीकों का सम्मान किया है और किसी भी तरह की अपमानजनक इरादा नहीं था। कांग्रेस ने पलटवार करते हुए भाजपा से कहा कि उन्हें इस तरह के मुद्दों पर राजनीतिक तनाव फैलाने की बजाय राष्ट्रीय पर्व की गरिमा बनाए रखने पर ध्यान देना चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि राष्ट्रपति भवन का ‘एट होम रिसेप्शन’ एक पारंपरिक और सांस्कृतिक समारोह है, जिसमें सभी नेताओं और आम नागरिकों को शामिल किया जाता है। इस अवसर पर परिधान और औपचारिकता को लेकर नियम निर्धारित हैं, लेकिन इसे राजनीतिक विवाद का कारण बनाना हाल के वर्षों में बढ़ता दिख रहा है।
समारोह में शामिल अन्य नेताओं ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राष्ट्रीय पर्वों को सियासी रंग देने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस का उद्देश्य देशभक्ति और एकता को प्रदर्शित करना है, न कि राजनीतिक बहस पैदा करना।
सामाजिक मीडिया पर भी यह मुद्दा तेजी से वायरल हुआ है। कुछ लोग भाजपा के रुख का समर्थन कर रहे हैं, जबकि कई नागरिक इसे अत्यधिक राजनीतिकरण मान रहे हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ऐसे विवाद राष्ट्रीय पर्वों की गरिमा को प्रभावित कर सकते हैं।
इस विवाद ने स्पष्ट कर दिया है कि गणतंत्र दिवस जैसे अवसरों पर पारंपरिक और सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान कितना महत्वपूर्ण है। वहीं राजनीतिक दलों के बीच साझा संवाद और संयम भी आवश्यक है, ताकि राष्ट्रीय पर्व का महत्व बनी रहे और इसे सियासी बहस का माध्यम न बनाया जाए।
इस प्रकार, राष्ट्रपति भवन में हुए पारंपरिक ‘एट होम रिसेप्शन’ ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि राष्ट्रीय पर्व और राजनीतिक मतभेद अक्सर एक-दूसरे में उलझ सकते हैं। जनता और मीडिया की नजर अब इस विवाद पर टिकी है कि दोनों पक्ष इसे संवेदनशीलता और समझदारी के साथ कैसे सुलझाते हैं।