पेट्रोल बचाने के लिए PM मोदी का कार पूलिंग आइडिया चर्चा में, लेकिन भारत में क्यों उलझता है कानूनी पेंच?
देश में बढ़ती ईंधन कीमतों और ट्रैफिक जाम की समस्या के बीच कार पूलिंग (Car Pooling) एक बार फिर चर्चा में है। प्रधानमंत्री Narendra Modi द्वारा सार्वजनिक परिवहन और साझा यात्रा (shared mobility) को बढ़ावा देने के विचार को लोगों ने काफी सराहा है। इसे पेट्रोल-डीजल की बचत, प्रदूषण कम करने और ट्रैफिक दबाव घटाने के लिए एक प्रभावी समाधान माना जा रहा है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में कार पूलिंग का कॉन्सेप्ट जितना आसान दिखता है, उतना ही कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर जटिल है। कई शहरों में यह सेवा अनौपचारिक रूप से तो लोकप्रिय है, लेकिन इसके रेगुलेशन को लेकर स्पष्ट नियमों की कमी एक बड़ी बाधा बनी हुई है।
परिवहन विशेषज्ञों के अनुसार, कार पूलिंग का मूल उद्देश्य निजी वाहनों का साझा उपयोग बढ़ाना है ताकि सड़क पर वाहनों की संख्या कम हो। इससे न केवल ईंधन की बचत होती है, बल्कि कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आती है। लेकिन भारत में इसका दायरा टैक्सी और प्राइवेट व्हीकल के बीच कानूनी रूप से स्पष्ट नहीं है, जिससे अक्सर भ्रम की स्थिति पैदा होती है।
सबसे बड़ा मुद्दा यह है कि निजी वाहनों (private vehicles) का व्यावसायिक उपयोग कई राज्यों में नियमों के तहत प्रतिबंधित है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति पैसे लेकर या नियमित रूप से राइड शेयरिंग करता है, तो वह कानूनी दायरे में आ सकता है। इसी वजह से कार पूलिंग प्लेटफॉर्म्स को लेकर भी अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू हैं।
इसके अलावा, बीमा (insurance) और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी एक बड़ा कारण हैं। यदि किसी साझा यात्रा के दौरान दुर्घटना होती है, तो यह स्पष्ट नहीं होता कि बीमा कवरेज किस हद तक लागू होगा। इसी वजह से कई लोग अनौपचारिक कार पूलिंग से बचते हैं।
सरकारी स्तर पर कई बार यह सुझाव दिया गया है कि भारत में एक समान राष्ट्रीय नीति बनाई जाए, जिससे कार पूलिंग को कानूनी संरक्षण मिल सके। कुछ महानगरों में इसे प्रोत्साहित करने के लिए कार-फ्री डे, HOV (High Occupancy Vehicle) लेन और ऐप आधारित राइड शेयरिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कार पूलिंग को सही तरीके से लागू किया जाए तो यह भारत के शहरी परिवहन संकट को काफी हद तक कम कर सकता है। इससे न केवल ईंधन की खपत घटेगी बल्कि सड़कों पर भीड़ और प्रदूषण में भी उल्लेखनीय कमी आएगी।
हालांकि, अभी सबसे बड़ी चुनौती नीति और कानून के बीच संतुलन बनाना है। जब तक स्पष्ट नियम और एकीकृत ढांचा तैयार नहीं होता, तब तक कार पूलिंग का यह विचार पूरी तरह से अपनी क्षमता के अनुसार लागू नहीं हो पाएगा।