दिल्ली SIR में 47 लाख से ज्यादा वोटरों के नाम बाहर, कई सीटों पर जीत के अंतर से भी ज्यादा कटौती; अंतिम सूची पर टिकी नजर
दिल्ली में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के बाद जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा दी है। 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट रोल में करीब 47.7 लाख मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं। यह संख्या दिल्ली की पिछली मतदाता सूची में दर्ज करीब 1.45 करोड़ मतदाताओं की लगभग एक तिहाई है। चुनाव आयोग के मुताबिक, यह प्रक्रिया घर-घर जाकर किए गए सत्यापन के बाद हुई है।
कई सीटों पर जीत के अंतर से ज्यादा नाम गायब
SIR के बाद सबसे ज्यादा चर्चा इस बात को लेकर है कि कई विधानसभा क्षेत्रों में ड्राफ्ट सूची से बाहर हुए मतदाताओं की संख्या पिछली बार के चुनावी नतीजों में जीत के अंतर से काफी ज्यादा है। ऐसे में यदि बड़ी संख्या में हटाए गए नाम अंतिम मतदाता सूची में भी शामिल नहीं होते हैं तो आने वाले चुनावों में इसका राजनीतिक असर पड़ सकता है।
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली की तुगलकाबाद विधानसभा सीट पर ड्राफ्ट सूची से हटने वाले मतदाताओं का अनुपात करीब 48 प्रतिशत बताया गया है, जो दिल्ली की 70 विधानसभा सीटों में सबसे अधिक है।
हालांकि, ड्राफ्ट सूची से नाम बाहर होना अंतिम रूप से मतदान का अधिकार खत्म होना नहीं है। निर्वाचन आयोग ने प्रभावित मतदाताओं को दावा और आपत्ति दर्ज कराने का मौका दिया है।
30 सितंबर तक नाम जुड़वाने का मौका
चुनाव आयोग ने ड्राफ्ट रोल जारी करने के साथ दावे और आपत्तियां दाखिल करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं हैं, वे 30 सितंबर तक आवेदन कर सकते हैं। नाम दोबारा शामिल कराने के लिए Form-6 का इस्तेमाल किया जा सकता है। आयोग के अनुसार आवेदन ऑनलाइन या संबंधित निर्वाचन कार्यालय के माध्यम से किया जा सकता है।
SIR के दौरान बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता भी पाए गए, जिन्हें मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या डुप्लीकेट रिकॉर्ड के कारण सूची से हटाया गया है। इसलिए ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह जरूरी नहीं कि हर मामला गलत तरीके से हटाए गए मतदाता का है। इसी वजह से दावा और आपत्ति की प्रक्रिया को अंतिम सूची तैयार करने से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक दलों की बढ़ सकती है चिंता
दिल्ली में SIR के आंकड़े सामने आने के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। आम आदमी पार्टी ने बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का आरोप है कि इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से चुनावी समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि SIR का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और अपात्र, मृत या स्थानांतरित मतदाताओं के नाम हटाना है। अंतिम सूची दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद तैयार की जाएगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 30 सितंबर तक कितने मतदाता अपने नाम दोबारा सूची में शामिल कराने में सफल होते हैं। अंतिम मतदाता सूची सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि दिल्ली की प्रत्येक विधानसभा सीट में मतदाताओं की संख्या में वास्तविक बदलाव कितना रहा और इसका चुनावी गणित पर कितना असर पड़ सकता है।