नेताओं पर से भरोसा उठ गया, सरकार से कोई आधी रात की डील नहीं हुई: सोनम वांगचुक
प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने कहा है कि अब उनका नेताओं पर से भरोसा उठ गया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अपने अनशन को समाप्त करने के लिए उन्होंने सरकार के साथ किसी तरह की "आधी रात की डील" नहीं की थी। वांगचुक ने इस तरह की सभी अटकलों और आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
'डील करनी होती तो पहले ही कर लेता'
सोनम वांगचुक ने कहा कि यदि उन्हें सरकार के साथ कोई समझौता ही करना होता तो वह बहुत पहले कर सकते थे। उन्होंने कहा, "अगर मुझे डील करनी होती तो मैं उसे पहले ही कर लेता। मुझे 26 दिन तक भूख हड़ताल पर बैठने की कोई जरूरत नहीं थी।"
उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन किसी व्यक्तिगत लाभ या राजनीतिक उद्देश्य के लिए नहीं था, बल्कि जनता के मुद्दों और अपनी मांगों को लेकर था।
नेताओं पर जताई नाराजगी
वांगचुक ने कहा कि लंबे समय से विभिन्न नेताओं के रवैये को देखने के बाद उनका राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा कम हो गया है। उन्होंने कहा कि जनता से किए गए वादों को गंभीरता से पूरा किया जाना चाहिए और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संवाद तथा पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण हैं।
अनशन को लेकर उठे थे सवाल
वांगचुक के अनशन समाप्त करने के बाद कुछ हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि उन्होंने सरकार के साथ किसी समझौते के बाद अपना आंदोलन खत्म किया। इन अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई समझौता नहीं हुआ और उनका फैसला पूरी तरह परिस्थितियों और आंदोलन की रणनीति के आधार पर लिया गया।
आंदोलन के उद्देश्य पर दिया जोर
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य हमेशा जनता के हितों और संवेदनशील मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाना रहा है। उन्होंने दोहराया कि उनका संघर्ष किसी पद, लाभ या राजनीतिक महत्वाकांक्षा के लिए नहीं, बल्कि लोगों की आवाज को मजबूती से सामने लाने के लिए है।
पारदर्शिता पर दिया जोर
सोनम वांगचुक ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए सरकार और राजनीतिक दलों को पारदर्शी तरीके से काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके आंदोलन और अनशन को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों पर लोग विश्वास न करें और केवल आधिकारिक तथ्यों पर भरोसा करें।
वांगचुक के इस बयान के बाद उनके आंदोलन और अनशन को लेकर चल रही चर्चाओं को नया आयाम मिल गया है। साथ ही, उन्होंने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सरकार के साथ किसी गुप्त समझौते के आरोप पूरी तरह निराधार हैं।