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‘बांग्लादेश से सीख’ वाले बयान पर नेहा बोरा की सफाई, बोलीं- वीडियो से की गई छेड़छाड़; RSS-BJP पर साधा निशाना

 

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा ने ‘बांग्लादेश से सीख लेने’ वाले अपने बयान पर उठे विवाद के बीच सफाई दी है। चौतरफा आलोचना के बाद नेहा ने 22 अक्टूबर को एक वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का आईटी सेल उनके बयान को संदर्भ से हटाकर और वीडियो से छेड़छाड़ करके प्रसारित कर रहा है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और संघ पर निशाना साधते हुए कहा कि इस तरह के वीडियो के जरिए लोगों के बीच आक्रोश पैदा करने की कोशिश की जा रही है। 

क्या है पूरा मामला?

विवाद की शुरुआत नेहा बोरा के उस वीडियो संदेश से हुई, जिसमें उन्होंने बांग्लादेश के छात्र आंदोलन का जिक्र करते हुए वहां के युवाओं से प्रेरणा लेने की बात कही थी। 14 अक्टूबर को बांग्लादेश के सोशलिस्ट स्टूडेंट्स फ्रंट के छठे राष्ट्रीय सम्मेलन के अवसर पर दिए गए संदेश में उन्होंने भारत और बांग्लादेश के युवाओं के आंदोलनों के बीच समानताएं बताई थीं।नेहा ने अपने संदेश में लोकतांत्रिक अधिकारों, मताधिकार और धार्मिक कट्टरवाद के खिलाफ संघर्ष का उल्लेख किया था। इसके बाद उनका वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगा और राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया। 

नेहा बोरा ने वीडियो जारी कर क्या कहा?

विवाद बढ़ने के बाद नेहा ने 5 मिनट 42 सेकेंड का एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बयान को संदर्भ से अलग करके पेश किया जा रहा है, ताकि उनके खिलाफ माहौल बनाया जा सके।नेहा ने भाजपा और आरएसएस पर निशाना साधते हुए कहा कि सांप्रदायिकता से परे एकजुटता की अवधारणा को समझने के बजाय उनके बयान को विवाद का विषय बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो के जरिए लोगों में आक्रोश पैदा करने की कोशिश की जा रही है।हालांकि, वीडियो से छेड़छाड़ किए जाने के उनके आरोप की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है। इसलिए इस दावे को नेहा बोरा का आरोप मानकर ही देखा जाना चाहिए।

SIR और मताधिकार के मुद्दे पर भी उठाए सवाल

अपने स्पष्टीकरण में नेहा बोरा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता अधिकारों और लोकतंत्र से जुड़े सवालों पर चल रहे आंदोलन को कमजोर करने के लिए उनके खिलाफ गलत जानकारी फैलाई जा रही है।उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए मतदाता सूची में बदलाव और पात्र मतदाताओं के अधिकारों को लेकर भी सवाल उठाए। हालांकि, मतदाता सूची से संबंधित उनके दावों का आकलन आधिकारिक आंकड़ों और निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना चाहिए।

भाजपा ने बयान पर पहले ही उठाए थे सवाल

नेहा बोरा के शुरुआती बयान के सामने आने के बाद भाजपा नेताओं ने उन पर निशाना साधा था। भाजपा प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने इस बयान को भारत में सत्ता परिवर्तन की मंशा से जोड़कर आरोप लगाए थे। दूसरी ओर, कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा था कि भारत में सरकार बदलने का रास्ता लोकतांत्रिक प्रक्रिया से ही होकर गुजरता है। 

अब आगे क्या?

नेहा बोरा की सफाई के बाद विवाद में उनके आरोप और भाजपा की पहले की आलोचना दोनों चर्चा का विषय बने हुए हैं। फिलहाल, उनके वीडियो से छेड़छाड़ किए जाने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में पूरे वीडियो, उसके मूल संदर्भ और संबंधित पक्षों के बयानों के आधार पर ही मामले का निष्पक्ष आकलन किया जा सकता है।इस विवाद ने एक बार फिर राजनीतिक बहस में सोशल मीडिया वीडियो, उनके संदर्भ और चुनावी अधिकारों से जुड़े मुद्दों को केंद्र में ला दिया है।