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दिल्ली बार काउंसिल चुनाव के बाद हाईकोर्ट के बाहर पसरी गंदगी, एनडीएमसी ने शुरू किया सफाई अभियान

 

राजधानी दिल्ली में दिल्ली बार काउंसिल (BCD) के चुनाव संपन्न होने के बाद Delhi High Court के सामने स्थित शेरशाह सूरी रोड पर भारी अव्यवस्था और गंदगी का नजारा देखने को मिला। मतदान के दौरान अधिवक्ताओं और उनके समर्थकों द्वारा बड़ी संख्या में पर्चे, पोस्टर और खाने-पीने की इस्तेमाल की गई प्लेटें सड़क पर ही फेंक दी गईं, जिससे पूरा इलाका कूड़े के ढेर में तब्दील हो गया।

📍 वीवीआईपी इलाके में बदहाल हालात

यह क्षेत्र नई दिल्ली नगर पालिका परिषद यानी New Delhi Municipal Council (एनडीएमसी) के अंतर्गत आता है, जिसे राजधानी का वीवीआईपी इलाका माना जाता है। आमतौर पर यहां सफाई व्यवस्था बेहद चुस्त-दुरुस्त रहती है और नियमित रूप से स्वच्छता अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे में हाईकोर्ट जैसे संवेदनशील और प्रतिष्ठित परिसर के बाहर फैली गंदगी ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

🗳️ मतदान के दौरान फैला कचरा

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चुनाव के दिन बड़ी संख्या में वकील, समर्थक और विभिन्न पैनलों के प्रतिनिधि वहां मौजूद थे। प्रचार सामग्री के तौर पर बांटे गए पर्चे, बैनर और कार्ड मतदान समाप्त होने के बाद सड़क पर बिखरे रह गए। इसके अलावा खानपान की व्यवस्था के चलते डिस्पोजेबल प्लेटें, गिलास और अन्य कचरा भी खुले में फेंक दिया गया।

परिणामस्वरूप, शेरशाह सूरी रोड पर पैदल चलना तक मुश्किल हो गया और पूरे इलाके की छवि धूमिल होती नजर आई।

🧹 एनडीएमसी की कार्रवाई

स्थिति बिगड़ने के बाद एनडीएमसी ने तुरंत सफाई अभियान शुरू कर दिया। सफाई कर्मचारियों की अतिरिक्त टीमें तैनात की गईं और सड़क से कचरा हटाने का कार्य युद्धस्तर पर किया गया। प्रशासन का कहना है कि इलाके की साफ-सफाई पूरी तरह बहाल कर दी जाएगी और भविष्य में ऐसे आयोजनों के दौरान विशेष निगरानी रखी जाएगी।

❓ जिम्मेदारी किसकी?

यह सवाल भी उठ रहा है कि चुनाव जैसे बड़े आयोजन के दौरान कचरा प्रबंधन की समुचित व्यवस्था क्यों नहीं की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि आयोजकों को पहले से कूड़ेदान, अस्थायी सफाई कर्मी और जागरूकता संदेशों की व्यवस्था करनी चाहिए थी, ताकि सार्वजनिक स्थल गंदगी का शिकार न बनें।

⚖️ संदेश और जिम्मेदारी

हाईकोर्ट जैसे प्रतिष्ठित न्यायिक संस्थान के सामने फैली गंदगी न केवल प्रशासनिक लापरवाही दर्शाती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि जागरूक नागरिकों और पेशेवर समुदाय को भी सार्वजनिक स्थानों की स्वच्छता के प्रति जिम्मेदार होना चाहिए।

अब देखना होगा कि भविष्य में ऐसे आयोजनों के लिए क्या नई गाइडलाइन तय की जाती हैं, ताकि राजधानी के महत्वपूर्ण इलाकों की स्वच्छ छवि बरकरार रह सके।