गाजियाबाद में 95 हजार से ज्यादा बच्चों की जांच, 4620 बीमार मिले; 17 के दिल में जन्म से छेद
गाजियाबाद जिले में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत किए गए सर्वे और जांच में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। मार्च से अगस्त 2026 के बीच जिले में कुल 95,576 बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई। इस दौरान 4,620 बच्चे विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से पीड़ित पाए गए। जांच में 17 बच्चों में जन्म से ही दिल में छेद होने की समस्या सामने आई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चों में जन्मजात बीमारियों और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान के लिए लगातार स्क्रीनिंग की जा रही है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिकित्सकीय टीमें स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और अन्य स्थानों पर बच्चों की जांच करती हैं। जांच का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान कर बच्चों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना है।
95,576 बच्चों की हुई स्वास्थ्य जांच
मार्च से अगस्त 2026 के बीच गाजियाबाद जिले में 95 हजार से अधिक बच्चों की जांच की गई। स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने बच्चों की सामान्य स्वास्थ्य स्थिति के साथ जन्मजात बीमारियों और अन्य शारीरिक समस्याओं की भी जांच की।
इस दौरान 4,620 बच्चों में अलग-अलग तरह की स्वास्थ्य समस्याएं पाई गईं। इन बच्चों को उनकी बीमारी और जरूरत के अनुसार आगे की जांच और उपचार के लिए रेफर किया गया।
17 बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पहचान
जांच के दौरान 17 बच्चों के दिल में जन्म से ही छेद होने की जानकारी सामने आई। जन्मजात हृदय रोग से जुड़ी इस समस्या की समय रहते पहचान होना महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि कई मामलों में उचित चिकित्सकीय उपचार से बच्चों को राहत मिल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से ऐसे बच्चों को आगे की विशेषज्ञ जांच और उपचार के लिए भेजने की प्रक्रिया की जाती है। इससे बच्चों को समय पर चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलती है।
समय पर बीमारी की पहचान पर जोर
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बच्चों की नियमित स्क्रीनिंग का मकसद ऐसी बीमारियों का पता लगाना है, जिनके लक्षण शुरुआती उम्र में स्पष्ट नहीं होते। कई जन्मजात बीमारियों की पहचान अगर समय रहते हो जाए तो उपचार की दिशा में जल्द कदम उठाए जा सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की टीमों द्वारा बच्चों की जांच के दौरान सामने आने वाले मामलों का रिकॉर्ड तैयार किया जाता है। गंभीर बीमारी या विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता वाले बच्चों को आगे के इलाज के लिए संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में भेजा जाता है।
गाजियाबाद में सामने आए ये आंकड़े बच्चों की नियमित स्वास्थ्य जांच के महत्व को भी सामने लाते हैं। खासतौर पर जन्मजात हृदय रोग जैसे मामलों में शुरुआती पहचान से बच्चों को समय पर इलाज उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ जाती है। आने वाले समय में भी स्वास्थ्य विभाग की ओर से बच्चों की स्क्रीनिंग और उपचार की प्रक्रिया जारी रखने पर जोर दिया जा रहा है।